चुंगलो-पारटांड़ में मजदूरों का जुटान, रूसी क्रांति के शहीदों को करेगा याद मोर्चा

NEWS SAGA DESK

गिरिडीह के चुंगलो, खेसमी और पारटांड़ फुटबॉल मैदान में रूसी क्रांति के शहीदों को नमन करने के लिए भव्य सभा का आयोजन किया जा रहा है। जानें इसकी खास बातें।

झारखंड के गिरिडीह जिले में वैचारिक और संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करते हुए भाकपा माले (CPI-ML) से जुड़े असंगठित मजदूर मोर्चा ने एक बड़े आयोजन की तैयारी पूरी कर ली है। इतिहास के पन्नों में दर्ज महान ऐतिहासिक घटनाओं को याद करने और मजदूरों-किसानों के अधिकारों को लेकर क्षेत्र में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से चुंगलो, खेसमी और पारटांड़ स्थित फुटबॉल मैदान में एक भव्य सभा का आयोजन किया जा रहा है। इस सभा में न सिर्फ पार्टी के प्रमुख नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे, बल्कि बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष भी जुटेंगे।

रूसी क्रांति के शहीदों को किया जाएगा याद

इस आयोजन का मुख्य केंद्र-बिंदु विश्व इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक—रूसी क्रांति के शहीदों को श्रद्धांजलि देना और उनके बलिदान को याद करना है। आयोजकों का मानना है कि श्रमिकों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए इतिहास के इन संघर्षों से प्रेरणा लेना बेहद जरूरी है।

मोर्चा के नेता कन्हाई पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि चुंगलो-खेसमी और पारटांड़ के फुटबॉल मैदान में होने वाली इस सभा के जरिए रूसी क्रांति के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों, उनकी समस्याओं और संगठन के आगामी विस्तार की रूपरेखा पर भी गंभीर चर्चा की जाएगी।

ग्रामीण एकता और मजदूरों की एकजुटता पर जोर

मजदूर नेता राजेश सिन्हा ने इस बात पर जोर दिया कि यह महाजुटान ग्रामीण एकता की मिसाल बनेगा। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब मजदूरों और गरीबों के सामने कई आर्थिक चुनौतियां हैं, ऐसे में संगठित होकर अपनी आवाज बुलंद करना वक्त की सबसे बड़ी मांग है। यह सभा मजदूरों, किसानों और ग्रामीणों को एक मंच पर लाने का काम करेगी, जिससे उनके हक की लड़ाई को और मजबूती मिल सकेगी।

इस सभा में माले और असंगठित मजदूर यूनियन के कई वरिष्ठ नेता शिरकत करेंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कन्हाई पांडेय, राजेश सिन्हा, मसूदन कोल, राजन तुरी, हुबलाल राय, भिखारी राय, लूटन दास, अमर तुरी, शंकर तुरी, वृहस्पति तुरी, सकलदेव कोल, किसुन कुल और प्रसाद तुरी जैसे जमीनी नेता दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं।

गांव-गांव में संगठन को मजबूत करने की रणनीति

सभा के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष चर्चा होगी:

  1. रूसी क्रांति का इतिहास और उसके संदेश: मजदूरों के अधिकारों के लिए हुए ऐतिहासिक संघर्षों की प्रासंगिकता।
  2. संगठन का विस्तार: गांव-गांव तक असंगठित मजदूर मोर्चा की पहुंच बढ़ाना और नए सदस्यों को जोड़ना।
  3. असंगठित मजदूरों के अधिकार: न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा और श्रम कानूनों के क्रियान्वयन पर मंथन।

आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि इस सभा में भारी संख्या में ग्रामीण और श्रमिक वर्ग के लोग पहुंचेंगे। यह आयोजन गिरिडीह के ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक और सामाजिक चेतना को एक नई दिशा देने का काम करेगा।

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