सिद्धार्थनगर हादसा: 60 फीट ऊंची पानी की टंकी पर 16 घंटे फंसे बच्चों का एयरफोर्स ने किया रेस्क्यू, एक की मौत

News Saga Desk

उत्तर प्रदेश के Siddharthnagar में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। काशीराम आवास कॉलोनी में रील बनाने के लिए जर्जर पानी की टंकी पर चढ़े पांच बच्चों में से एक की मौत हो गई, जबकि दो बच्चे करीब 16 घंटे तक टंकी पर फंसे रहे। आखिरकार भारतीय वायुसेना के MI-17 हेलिकॉप्टर की मदद से दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

रील बनाने के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के मुताबिक शनिवार दोपहर पांच बच्चे कॉलोनी के पास स्थित करीब 60 फीट ऊंची बंद पड़ी पानी की टंकी पर वीडियो और रील बनाने के लिए चढ़े थे। कुछ देर बाद जब बच्चे नीचे उतरने लगे, तभी टंकी की पुरानी और जर्जर सीढ़ी अचानक टूट गई।

सीढ़ी टूटते ही बाले, शनि और गोलू नीचे गिर गए। हादसे में बाले के ऊपर सीढ़ी का मलबा गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं शनि और गोलू गंभीर रूप से घायल हो गए। दूसरी तरफ कल्लू और पवन किसी तरह लोहे की रॉड पकड़कर ऊपर ही फंसे रह गए।

दलदल बना रेस्क्यू में सबसे बड़ी चुनौती

घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। टंकी के चारों ओर पानी भरा होने के कारण जमीन दलदली हो चुकी थी। इसी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में लगातार दिक्कतें आती रहीं। गोरखपुर से मंगाई गई हाइड्रॉलिक क्रेन दलदल के कारण टंकी तक नहीं पहुंच सकी। बाद में दूसरी क्रेन मंगाने की कोशिश भी की गई, लेकिन तकनीकी खामी और दूरी की वजह से राहत कार्य प्रभावित हुआ।

रातभर चला राहत कार्य

प्रशासन ने बच्चों तक रस्सी के सहारे खाना और पानी पहुंचाया। इसके बाद जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से टंकी तक पहुंचने के लिए करीब 150 मीटर लंबी अस्थायी सड़क बनाने का काम शुरू किया गया। देर रात तक लगभग 120 मीटर रास्ता तैयार कर लिया गया था। हालांकि रात करीब 3 बजे तेज बारिश शुरू होने से काम रोकना पड़ा। हालात गंभीर होते देख प्रशासन ने सेना और वायुसेना से मदद मांगी।

एयरफोर्स के MI-17 हेलिकॉप्टर से बचाई गई जान

रविवार सुबह करीब 5:20 बजे भारतीय वायुसेना का MI-17 हेलिकॉप्टर घटनास्थल पर पहुंचा। लंबे ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। बाद में उन्हें इलाज के लिए गोरखपुर स्थित एयरफोर्स अस्पताल भेजा गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक जिस पानी की टंकी पर बच्चे चढ़े थे, वह करीब 26 साल से बंद पड़ी थी। जर्जर हालत के कारण उसका इस्तेमाल पहले ही बंद कर दिया गया था। हैरानी की बात यह है कि वहां किसी तरह का चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी।

अब इस हादसे के बाद प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते टंकी को सुरक्षित किया गया होता, तो यह बड़ा हादसा टल सकता था।

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