आयुष्मान खुराना बोले, मेरे लिए स्क्रिप्ट सबसे पहले आती है

आयुष्मान खुराना ने बताया कि उनके लिए फिल्म में निर्देशक के अनुभव से ज्यादा स्क्रिप्ट और विजन मायने रखता है। जानिए ‘उड़ता तीर’ और उनके फिल्मी सफर की खास बातें।

News Saga Desk

बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना एक बार फिर अपनी पसंद की फिल्मों और नए फिल्मकारों के साथ काम करने की अपनी सोच को लेकर चर्चा में हैं। अपने एक दशक से अधिक के फिल्मी करियर में उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया है, जिनकी कहानियां पारंपरिक हिंदी सिनेमा से अलग रही हैं। आयुष्मान का मानना है कि किसी फिल्म की सफलता के लिए निर्देशक का अनुभव ही सबसे महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि उसकी कहानी, रचनात्मक सोच और विजन भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसी सोच के साथ वह अपनी आगामी फिल्म ‘उड़ता तीर’ के जरिए एक नए निर्देशक के साथ काम कर रहे हैं।

आकाश ए. कौशिक के निर्देशन में बनी यह फिल्म देशभक्ति, कॉमेडी और जासूसी का अनोखा मिश्रण पेश करने वाली है। फिल्म में आयुष्मान एक पाकिस्तानी जासूस की भूमिका निभा रहे हैं, जिसकी याददाश्त चली जाती है और वह खुद को भारतीय समझने लगता है। अभिनेता के मुताबिक, फिल्म की दिलचस्प कहानी और निर्देशक की अलग सोच ने उन्हें इस परियोजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

स्क्रिप्ट को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं आयुष्मान

आयुष्मान खुराना ने अपने करियर में लगातार अलग-अलग विषयों पर आधारित फिल्मों को प्राथमिकता दी है। उनका मानना है कि किसी फिल्म को चुनते समय सबसे पहले उसकी कहानी पर ध्यान देना चाहिए। वह इस बात को ज्यादा महत्व नहीं देते कि निर्देशक अपनी पहली फिल्म बना रहा है या पहले कई फिल्मों का निर्देशन कर चुका है।

अपने इस नजरिए के बारे में बात करते हुए आयुष्मान ने कहा, “मेरे लिए स्क्रिप्ट हमेशा सबसे पहले आती है। मैं यह नहीं देखता कि कोई फिल्ममेकर अपनी पहली फिल्म डायरेक्ट कर रहा है या दसवीं फिल्म। मैं यह देखता हूं कि क्या उसके पास ऐसी कहानी और विजन है, जो मुझे उत्साहित कर सके।”

अभिनेता के अनुसार, एक अच्छी कहानी कलाकार को अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने और नए प्रयोग करने का अवसर देती है। यही वजह है कि वह ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना पसंद करते हैं, जिनमें कुछ नया कहने की क्षमता हो।

नए निर्देशकों के साथ काम करने का रहा है लंबा अनुभव

आयुष्मान खुराना का फिल्मी सफर नए निर्देशकों के साथ काम करने के कई उदाहरणों से भरा हुआ है। उन्होंने अपने करियर में ऐसे फिल्मकारों पर भरोसा किया है, जो हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे। उनकी फिल्मों में ‘दम लगा के हईशा’, ‘शुभ मंगल सावधान’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’, ‘डॉक्टर जी’ और ‘एन एक्शन हीरो’ शामिल हैं।

आयुष्मान

इन फिल्मों का निर्देशन क्रमशः शरत कटारिया, आर. एस. प्रसन्ना, राज शांडिल्या, हितेश केवल्या, अनुभूति कश्यप और अनिरुद्ध अय्यर ने किया था। इनमें से कई फिल्मकारों के लिए ये शुरुआती निर्देशन परियोजनाएं थीं।

इन फिल्मों की व्यावसायिक सफलता अलग-अलग रही, लेकिन इन सभी में विषयों के चयन और प्रस्तुति को लेकर प्रयोग देखने को मिले। आयुष्मान के अनुसार, नए फिल्मकारों के पास अपनी कहानियों को पेश करने का अलग तरीका होता है। वे परिचित विषयों को भी नए नजरिए से देखने का साहस रखते हैं।

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नए फिल्मकारों की सोच में दिखती है ताजगी

आयुष्मान खुराना का मानना है कि नए निर्देशकों के साथ काम करने का अनुभव कई मायनों में खास होता है। उनके मुताबिक, नए फिल्मकार अपने साथ एक अलग ऊर्जा, उत्साह और रचनात्मक स्वतंत्रता लेकर आते हैं। वे कई बार ऐसी कहानियों को पर्दे पर उतारने का प्रयास करते हैं, जिन्हें पारंपरिक तरीके से प्रस्तुत करना मुश्किल हो सकता है।

अभिनेता ने कहा कि उनके करियर के कुछ यादगार अनुभव नए लोगों के साथ काम करने से जुड़े रहे हैं। उनके मुताबिक, नए निर्देशकों में अपनी पहचान बनाने की भूख होती है और यही उन्हें नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है।

उनका यह नजरिया उनकी फिल्म चयन प्रक्रिया में भी दिखाई देता है। वह ऐसी कहानियों को प्राथमिकता देते हैं, जिनमें मनोरंजन के साथ कोई नया विचार या सामाजिक दृष्टिकोण भी मौजूद हो। यही वजह है कि उनकी कई फिल्मों ने सामान्य बॉलीवुड कहानियों से अलग विषयों को दर्शकों के सामने रखा है।

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