बाबूलाल मरांडी ने पश्चिमी सिंहभूम में हेमंत सोरेन सरकार पर कानून-व्यवस्था, अवैध खनन और DMFT फंड में अनियमितता के आरोप लगाए। ‘हो’ भाषा और सरना धर्म कोड की मांग भी उठी।
News Saga Desk
बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला मंगलवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले के मेघाहातुबुरू में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान देखने को मिला। झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था, अवैध खनन, भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे कई मुद्दों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। कार्यक्रम के दौरान आदिवासी ‘हो समाज युवा महासभा’ ने ‘हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और अलग सरना धर्म कोड लागू करने का ज्ञापन भी सौंपा।
कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सबसे अधिक केंद्रित रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम लोग असुरक्षा के माहौल में जीवन जी रहे हैं।
मरांडी ने कहा कि हत्या और अन्य आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन अपराधियों में कानून का कोई भय नहीं दिखता। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस अपराध नियंत्रण के बजाय अवैध कारोबार से वसूली में अधिक व्यस्त दिखाई देती है।
अवैध बालू खनन और भ्रष्टाचार पर आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य में अवैध बालू खनन को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में अवैध खनन का कारोबार खुलेआम चल रहा है और इससे होने वाली कथित काली कमाई सत्ता के शीर्ष तक पहुंच रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट को रोकने के बजाय सरकार भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है। बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला इस मुद्दे पर भी काफी तीखा रहा।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर उठाए सवाल
मरांडी ने कहा कि राज्य के पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने सरकारी अस्पतालों और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सरकार असफल रही है।
उनके अनुसार विकास कार्यों की गति धीमी है और प्रशासनिक प्राथमिकताओं में जनहित के बजाय अन्य मुद्दों को महत्व दिया जा रहा है।
DMFT फंड की निष्पक्ष जांच की मांग
कार्यक्रम में बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर हमला डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के मुद्दे पर भी जारी रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी सिंहभूम जिले में DMFT फंड के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से मिलने वाली राशि स्थानीय लोगों के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च होनी चाहिए। मरांडी ने पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
‘हो’ भाषा और सरना धर्म कोड की उठी मांग
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी ‘हो समाज युवा महासभा’ की केंद्रीय समिति ने राष्ट्रीय संगठन सचिव गोपी लागुरी के नेतृत्व में बाबूलाल मरांडी को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में ‘हो’ भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा आदिवासी समुदाय के लिए अलग सरना धर्म कोड लागू कराने की मांग केंद्र सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया गया।
गोपी लागुरी ने कहा कि ‘हो’ समाज लंबे समय से अपनी भाषा और धार्मिक पहचान को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
मेघाहातुबुरू में आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गागराई, जे.बी. तुबिद, मंगल गिलुवा सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, कार्यकर्ता, ग्रामीण और ‘हो’ समाज के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इसे भी देखे- New twist in Bharat Tiwari encounter case, controversy deepens after sisters
आधिकारिक जानकारी और सार्वजनिक महत्व
बाबूलाल मरांडी द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं। समाचार में राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
वहीं, ‘हो’ भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने और सरना धर्म कोड लागू करने की मांग लंबे समय से विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा उठाई जाती रही है। इन विषयों पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संसद की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जा सकता है।
No Comment! Be the first one.