महिला आरक्षण बिल पर लगा BJP को बड़ा झटका, लोकसभा में पारित नहीं हो सका विधेयक

News Saga Desk

महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिली। सरकार ने विपक्ष का समर्थन हासिल करने की पूरी कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने सहयोग नहीं किया। अंततः सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही और विधेयक सदन में गिर गया।

पिछले 12 वर्षों में यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार का कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। इसे सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हालांकि, कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार इस मुद्दे को विपक्ष के खिलाफ राजनीतिक तौर पर भुना सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, सरकार को पहले से ही अपने संख्या बल को लेकर स्थिति स्पष्ट थी, इसके बावजूद चुनावी माहौल के बीच इस विधेयक को लाया गया। माना जा रहा है कि इसके जरिए खासकर पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति बनाई गई थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख पर असर डाल सकता है, लेकिन राजनीतिक संदेश देने के लिहाज से इसे एक रणनीतिक कदम भी माना जा रहा है।

कुछ विश्लेषक यह भी सवाल उठा रहे हैं कि चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय कितना उचित था। उनके मुताबिक, सरकार इस मुद्दे को चुनावी नैरेटिव बनाने के उद्देश्य से लेकर आई, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि वह महिलाओं के हित में कदम उठाना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने साथ नहीं दिया।

दूसरी ओर, यह भी कहा जा रहा है कि विधेयक के पारित न होने के बावजूद सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्य में आंशिक रूप से सफल रही है। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहां अलग-अलग मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज है, वहां महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर सरकार ने अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश की है।

करीब चार दशकों से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की चर्चा चल रही है। इस लंबे समय के दौरान यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना रहा है। विधेयक पेश होने से पहले ही भाजपा ने इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाना शुरू कर दिया था।

अब पार्टी यह संदेश देने की स्थिति में है कि उसने महिलाओं के अधिकारों के लिए पूरी कोशिश की, लेकिन विपक्ष के सहयोग की कमी के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में महिला मतदाता इस संदेश से प्रभावित होती हैं, तो आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

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