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प्रयागराज :- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ)-2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 18 जून को होगी।
यह आदेश जस्टिस कुणाल रवि सिंह ने पंकज वर्मा एवं दो अन्य की ओर से दायर याचिका पर पारित किया।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यूपीपीएससी के अधिवक्ता से यह स्पष्ट करने को कहा कि याचिका दायर करने वाले तीनों अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान आयु सीमा में छूट अथवा किसी अन्य आरक्षण संबंधी लाभ का उपयोग किया था या नहीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि तीनों अभ्यर्थियों ने किसी प्रकार की आयु सीमा छूट का लाभ नहीं लिया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आयोग के अधिवक्ता को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश प्राप्त कर जानकारी प्रस्तुत करने को कहा। आयोग की ओर से समय मांगे जाने पर न्यायालय ने सुनवाई स्थगित करते हुए अगली तिथि 18 जून निर्धारित की।
याचिकाकर्ताओं ने यूपीपीएससी द्वारा 9 जनवरी 2020 को जारी कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) और एपीओ-2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि मेरिट सूची में आने वाले आरक्षित वर्ग (Meritorious Reserved Category) के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में समायोजित नहीं किया गया, बल्कि उन्हें उनकी मूल श्रेणी में रखा गया। इससे आरक्षण नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ और कई अभ्यर्थी प्रारंभिक परीक्षा में चयनित होने से वंचित रह गए।
याचिका में कार्यालय ज्ञापन और प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को निरस्त करने, मुख्य परीक्षा पर रोक लगाने तथा मेरिटोरियस आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में समायोजित करते हुए परिणाम पुनः जारी करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि आयोग का कार्यालय ज्ञापन यह व्यवस्था देता है कि आरक्षण का लाभ चयन की अंतिम प्रक्रिया में दिया जाएगा, जबकि यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश आरक्षण अधिनियम 1994 तथा दीपेंद्र यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य निर्णय और सौरव यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित सिद्धांतों के विपरीत है।
उल्लेखनीय है कि एपीओ-2025 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 30 अप्रैल 2026 को घोषित किया गया था, जबकि मुख्य परीक्षा 28 जून से 30 जून 2026 के बीच प्रस्तावित है।
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