JRGA Foundation की महत्वाकांक्षी सिल्क कॉरिडोर पहल को पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री उमेश राय का समर्थन मिला। हावड़ा में आयोजित बैठक में वस्त्र, हथकरघा, कौशल विकास और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।
News Saga Desk
हावड़ा में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान JRGA Foundation की महत्वाकांक्षी “सिल्क कॉरिडोर” पहल को नई मजबूती मिली है। पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री उमेश राय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पूर्वी भारत के वस्त्र एवं परिधान उद्योग के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर JRGA Foundation के अध्यक्ष अभिताभ श्रीवास्तव एवं महासचिव उत्तम रॉय ने मंत्री उमेश राय को सम्मानित किया और फाउंडेशन की विभिन्न योजनाओं तथा सिल्क कॉरिडोर विज़न पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के दौरान JRGA Foundation ने पूर्वी भारत में रेशम, वस्त्र, हथकरघा और परिधान उद्योग को एक साझा विकास मंच प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए सिल्क कॉरिडोर की रूपरेखा प्रस्तुत की। फाउंडेशन का मानना है कि यह पहल झारखंड, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के बुनकरों, कारीगरों तथा वस्त्र उद्योग से जुड़े उद्यमियों को नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मंत्री उमेश राय ने फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने कहा कि सिल्क कॉरिडोर जैसी पहलें न केवल पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान देंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगी। उन्होंने इस अवधारणा को पूर्वी भारत के समग्र विकास के लिए उपयोगी बताते हुए सुझाव दिया कि इस विषय पर पश्चिम बंगाल की माननीय मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जानी चाहिए, ताकि राज्य स्तर पर सहयोग और समन्वय को और मजबूत बनाया जा सके।
मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि आवश्यकता पड़ने पर वे वस्त्र मंत्रालय और अन्य संबंधित विभागों के साथ संवाद स्थापित कराने में सहयोग करेंगे। उनका मानना है कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से वस्त्र एवं रेशम उद्योग को नई गति मिल सकती है और इससे हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी।
JRGA Foundation के अध्यक्ष अभिताभ श्रीवास्तव ने कहा कि फाउंडेशन का उद्देश्य केवल उद्योग का विस्तार करना नहीं, बल्कि बुनकरों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को एक सशक्त मंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि सिल्क कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से उत्पादन, विपणन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की योजना है, जिससे क्षेत्रीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिल सके।
महासचिव उत्तम रॉय ने कहा कि झारखंड और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में वस्त्र और रेशम उद्योग की समृद्ध परंपरा रही है। यदि दोनों राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाए, तो यह क्षेत्र देश के प्रमुख वस्त्र उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन इस दिशा में विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह मुलाकात झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच वस्त्र, हथकरघा, कौशल विकास और आजीविका संवर्धन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिल्क कॉरिडोर जैसी पहलें पूर्वी भारत के पारंपरिक उद्योगों को नई ऊर्जा प्रदान कर सकती हैं और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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