कोलकाता में ISKCON की मेगा किचन शुरू, 44 हजार छात्रों को मिलेगा मिड-डे मील

NEWS SAGA DESK

कोलकाता में ISKCON की नई मेगा किचन से 500 स्कूलों के 44 हजार छात्रों के लिए मिड-डे मील तैयार होगा। योजना का दायरा तीन महीने में 2.5 लाख छात्रों तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

कोलकाता: ISKCON मिड-डे मील कोलकाता पहल के तहत शहर में एक आधुनिक मेगा किचन का शुभारंभ किया गया है। इस रसोई से शुरुआती चरण में 500 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के करीब 44,000 छात्र-छात्राओं के लिए मध्याह्न भोजन तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम में राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और मिड-डे मील व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाना है। ISKCON मिड-डे मील कोलकाता परियोजना को आने वाले महीनों में और विस्तारित करने की योजना है।

कोलकाता: ISKCON मिड-डे मील कोलकाता

नोट: आपके द्वारा दिए गए इनपुट में “पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी” लिखा गया है। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं, जबकि शुभेंदु अधिकारी राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। इसलिए नीचे दिया गया लेख केवल उस पहल पर केंद्रित है और मुख्यमंत्री संबंधी दावे को तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता।

500 स्कूलों के 44 हजार छात्रों को मिलेगा लाभ

नई मेगा किचन के माध्यम से पहले चरण में कोलकाता के 500 सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के लगभग 44,000 विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन मध्याह्न भोजन तैयार किया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, अगले तीन महीनों के भीतर इस सुविधा का विस्तार कर लगभग 2.5 लाख छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भोजन तैयार करने और वितरण की क्षमता को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।

कोलकाता: ISKCON मिड-डे मील कोलकाता

प्रति छात्र भोजन पर बढ़ा आवंटन

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि प्रति छात्र भोजन के लिए आवंटित राशि बढ़ाकर 10 रुपये कर दी गई है। इसका उद्देश्य भोजन की गुणवत्ता और पोषण स्तर को बेहतर बनाना है।

नई व्यवस्था के तहत आधुनिक रसोई में स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का पालन करते हुए भोजन तैयार किया जाएगा, जिसे विशेष वाहनों के माध्यम से स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा।

सप्ताह में दो दिन मिलेंगे उबले अंडे

ISKCON मिड-डे मील कोलकाता पहल के तहत तैयार किए जाने वाले शाकाहारी भोजन के अलावा, राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से विद्यार्थियों को सप्ताह में दो दिन उबले हुए अंडे भी उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।

इसका उद्देश्य बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है, जिससे उनके स्वास्थ्य और शारीरिक विकास में मदद मिल सके।

कोलकाता: ISKCON मिड-डे मील कोलकाता

किसी रसोइया की नौकरी नहीं जाएगी

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि मौजूदा मिड-डे मील व्यवस्था में कार्यरत रसोइयों की सेवाएं समाप्त नहीं की जाएंगी।

साथ ही बताया गया कि रसोई कर्मचारियों का मासिक मानदेय पहले ही बढ़ाकर 3,000 रुपये किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य मौजूदा प्रणाली को मजबूत करना है, न कि रोजगार प्रभावित करना।

ISKCON मिड-डे मील कोलकाता परियोजना का उद्देश्य आधुनिक केंद्रीकृत रसोई के माध्यम से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों तक समय पर स्वच्छ और पौष्टिक भोजन पहुंचाना है।

देश के कई शहरों में ऐसी केंद्रीकृत रसोई पहले से संचालित हैं, जहां निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार भोजन तैयार कर विद्यालयों तक पहुंचाया जाता है।

इस पहल से मिड-डे मील की गुणवत्ता, वितरण व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा मानकों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। बड़े पैमाने पर भोजन तैयार करने के लिए आधुनिक उपकरणों और व्यवस्थित लॉजिस्टिक्स का उपयोग किया जाएगा।

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इसके साथ ही पौष्टिक भोजन उपलब्ध होने से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, उपस्थिति और सीखने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य मिड-डे मील योजना को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। भोजन तैयार करने से लेकर स्कूलों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी की जाएगी सरकार और संबंधित संस्थाएं इस परियोजना के विस्तार और संचालन की लगातार समीक्षा करेंगी, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

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