JPSC JSSC छात्र आंदोलन आठवें दिन भी जारी रहा। छात्रों ने राजनीतिक दलों से दूरी बनाकर नया धरना स्थल चुना। अनुमति नहीं मिलने पर जमीन पर बैठे अभ्यर्थी।
News saga Desk
रांची में JPSC JSSC छात्र आंदोलन शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी लगातार धरना दे रहे हैं। शुक्रवार को धरना स्थल पर राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर हुए विवाद के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन राजनीतिक दलों से पूरी तरह अलग रखने का फैसला किया है। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल छात्रों का है और इसका संचालन किसी राजनीतिक दल या नेता के हाथ में नहीं होगा।
शुक्रवार को कुछ छात्र नेताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों ने धरना स्थल पर मंच से संबोधित करने का प्रयास किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विवाद के बाद अभ्यर्थियों ने पुराना धरना स्थल छोड़ने और नया स्थान चुनने का निर्णय लिया। छात्रों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाना है और इसे किसी राजनीतिक संगठन का आंदोलन नहीं बनने दिया जाएगा।
आठवें दिन भी छात्रों का प्रदर्शन जारी
JPSC JSSC छात्र आंदोलन के आठवें दिन भी अभ्यर्थियों के तेवर कमजोर नहीं पड़े। छात्र अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे हुए हैं। शुक्रवार की घटना के बाद अधिकांश प्रदर्शनकारियों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के दूसरे गेट के पास नया धरना स्थल बनाने का निर्णय लिया।
हालांकि, नए स्थान पर प्रशासन की ओर से फिलहाल टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित स्थान के लिए अभी अनुमति जारी नहीं हुई है। इसी वजह से वहां अस्थायी ढांचा लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
टेंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद छात्रों ने अपना प्रदर्शन नहीं रोका। अभ्यर्थी दरी बिछाकर तेज धूप में धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर उचित पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
राजनीतिक दलों से बनाई स्पष्ट दूरी
शुक्रवार की घटना के बाद छात्रों ने अपने आंदोलन को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल के समर्थन या हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार, आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और मंच पर राजनीतिक नेताओं को जगह नहीं दी जाएगी।
अभ्यर्थियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई राजनीतिक नेता या संगठन केवल नैतिक समर्थन देना चाहता है तो उसका स्वागत है, लेकिन आंदोलन के मंच और संचालन में किसी बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
छात्रों का मानना है कि राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने से आंदोलन की मूल मांग और उद्देश्य स्पष्ट रहेंगे। वे चाहते हैं कि JPSC JSSC छात्र आंदोलन को केवल भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी छात्रों की समस्या के रूप में देखा जाए, न कि किसी राजनीतिक अभियान के तौर पर।
छात्रों ने खुद संभाली भोजन व्यवस्था
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के लिए भोजन की व्यवस्था भी छात्रों द्वारा आपसी सहयोग से की जा रही है। छात्र आपस में सहयोग राशि एकत्र कर भोजन का इंतजाम कर रहे हैं। इसके अलावा आंदोलन का समर्थन करने वाले कुछ लोग ऑनलाइन माध्यम से भोजन और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं।
प्रशासन की ओर से धरना स्थल पर भोजन बनाने की अनुमति नहीं होने के कारण छात्र वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए अपना आंदोलन जारी रखे हुए हैं। तेज धूप और बुनियादी सुविधाओं की चुनौती के बावजूद छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।

यह व्यवस्था आंदोलन में छात्रों की सामूहिक भागीदारी को भी दिखाती है। प्रदर्शनकारी अपने स्तर पर जरूरी संसाधनों का इंतजाम कर रहे हैं और किसी राजनीतिक संगठन से आर्थिक सहायता लेने से बच रहे हैं।
पुराने धरना स्थल पर क्या स्थिति है?
नया धरना स्थल चुनने के बाद पुराने स्थान पर प्रदर्शनकारियों की संख्या काफी कम हो गई है। आंदोलनकारी छात्रों का दावा है कि पुराने धरना स्थल पर अब मौजूद कुछ लोग विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हुए हैं।
वहीं, खुद को विशुद्ध छात्र आंदोलन का हिस्सा बताने वाले अधिकांश अभ्यर्थी नए स्थान पर एकजुट हैं। छात्रों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक पहचान के साथ आंदोलन नहीं करना चाहते। उनका फोकस केवल JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर है।
प्रशासन की अनुमति को लेकर स्थिति
नए धरना स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं मिलने से छात्रों को खुले में प्रदर्शन करना पड़ रहा है। प्रशासन का कहना है कि संबंधित स्थान के लिए अभी अनुमति जारी नहीं हुई है। ऐसे में अस्थायी ढांचा लगाने की अनुमति देना संभव नहीं है।
दूसरी ओर, अभ्यर्थियों ने प्रशासनिक अनुमति के अभाव को अपने आंदोलन के रास्ते में बाधा नहीं बनने दिया है। वे फिलहाल जमीन पर दरी बिछाकर धरना दे रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत और अनुमति की स्थिति महत्वपूर्ण हो सकती है।
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आगे भी जारी रखने का दावा
JPSC JSSC छात्र आंदोलन को लेकर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उनका कहना है कि आंदोलन को राजनीतिक रंग से बचाते हुए छात्रों के मुद्दे पर केंद्रित रखा जाएगा। आठ दिनों से जारी धरने में छात्रों ने अपनी एकजुटता बनाए रखी है।
अब छात्रों की नजर संबंधित आयोगों और सरकार की ओर से संभावित कार्रवाई पर है। अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाब और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। फिलहाल आंदोलन का अगला चरण क्या होगा, यह प्रशासनिक अनुमति और छात्रों की आगे की रणनीति पर निर्भर करेगा।
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