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इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा | रांची में पहली बार इस्कॉन की ओर से भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी यात्रा में भाग लेकर सेवा की।
इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा | रांची में इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा का ऐतिहासिक आयोजन शनिवार को पहली बार भव्य रूप से किया गया। कांके रोड स्थित इस्कॉन मंदिर से भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सजे-धजे रथ को पूरे विधि-विधान के साथ रवाना किया गया। इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ भक्ति और उत्साह में सराबोर नजर आए। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। यह आयोजन रांची के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
रांची में पहली बार निकली इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा
इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत कांके रोड स्थित इस्कॉन मंदिर से हुई। रंग-बिरंगे फूलों और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित रथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। यात्रा के दौरान भजन-कीर्तन, मृदंग और करताल की मधुर धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
हजारों श्रद्धालु परिवार सहित रथ यात्रा में शामिल हुए और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर यात्रा का स्वागत किया।

केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने की सेवा
रथ यात्रा में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी शामिल हुए। उन्होंने भगवान जगन्नाथ का पूजन-अर्चन कर आशीर्वाद लिया और परंपरा का पालन करते हुए रथ यात्रा मार्ग पर झाड़ू लगाकर सेवा की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस्कॉन ने भगवान श्रीकृष्ण और भगवान राम के प्रेम, शांति और मानवता के संदेश को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि आज जब विश्व युद्ध, हिंसा और तनाव जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भगवान श्रीकृष्ण का प्रेम, शांति और धर्म का संदेश पूरी मानवता के लिए पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है। उनके अनुसार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा समाज में भाईचारा, सद्भाव, शांति और समृद्धि का संदेश देती है।
इस्कॉन रांची ने बताई रथ यात्रा की विशेषता
रांची इस्कॉन के प्रबंधक मधुसूदन मुकुंद दास ने बताया कि भगवान जगन्नाथ पूरे विश्व के नाथ हैं और इस्कॉन पिछले लगभग 60 वर्षों से दुनिया के विभिन्न देशों में भव्य रथ यात्राओं का आयोजन करता आ रहा है।
उन्होंने कहा कि इसी वैश्विक परंपरा के तहत इस वर्ष पहली बार रांची में भी इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं ताकि वे लोग भी उनके दर्शन कर सकें जो किसी कारणवश मंदिर नहीं पहुंच पाते। यही रथ यात्रा “वसुधैव कुटुंबकम” अर्थात पूरी दुनिया एक परिवार है, के संदेश को जन-जन तक पहुंचाती है।
श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने बड़ी संख्या में रथ यात्रा में भाग लिया। भजन-कीर्तन के साथ भक्त भगवान जगन्नाथ के जयकारे लगाते हुए रथ के साथ आगे बढ़ते रहे।
यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि वर्ष में एक बार भगवान स्वयं अपने भक्तों के दर्शन देने मंदिर से बाहर निकलते हैं। इस दौरान जो श्रद्धालु रथ के दर्शन करते हैं या रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं, उन्हें विशेष आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है।

इस्कॉन द्वारा आयोजित रथ यात्राएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं होतीं, बल्कि प्रेम, सेवा, समानता और वैश्विक भाईचारे का संदेश भी देती हैं।
इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) पिछले छह दशकों से दुनिया के अनेक देशों में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आयोजित करता आ रहा है। रांची में पहली बार इस परंपरा की शुरुआत होने से शहर के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
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रांची में पहली बार आयोजित इस्कॉन जगन्नाथ रथ यात्रा ने धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को नई ऊर्जा दी। इस आयोजन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को एक मंच पर जोड़ने के साथ सामाजिक सद्भाव, सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश भी दिया।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का शांति और प्रेम का संदेश आज पूरे विश्व के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। वहीं इस्कॉन रांची के प्रबंधक मधुसूदन मुकुंद दास ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को समाज तक पहुंचाने का माध्यम है।
इस्कॉन रांची ने श्रद्धालुओं से भविष्य में भी धार्मिक आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने और भगवान जगन्नाथ के प्रेम, सेवा एवं भाईचारे के संदेश को समाज तक पहुंचाने की अपील की है।
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