झारखंड में चिकित्सक संगठनों ने सरकार को 14 दिसंबर 2026 तक मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर 15 दिसंबर से डॉक्टर कार्य बहिष्कार करेंगे।
रांची: झारखंड में डॉक्टरों और राज्य सरकार के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बढ़ता नजर आ रहा है। चिकित्सक संगठनों ने सरकार को 14 दिसंबर 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। संगठनों ने स्पष्ट किया है कि अगर इस अवधि तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 15 दिसंबर से राज्यभर में कार्य बहिष्कार आंदोलन शुरू किया जाएगा।
दरअसल, अपर मुख्य सचिव और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद चिकित्सक संगठनों ने ऑनलाइन जूम बैठक की। इसमें सर्वसम्मति से आंदोलन की चेतावनी देने का फैसला लिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी लंबित मांगों पर अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय और उनका क्रियान्वयन जरूरी है।
डॉक्टरों की सुरक्षा और करियर में तरक्की प्रमुख मांग
चिकित्सक संगठनों की प्रमुख मांगों में झारखंड मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी तरीके से लागू करना और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट (CEA) में जरूरी बदलाव करना शामिल है। डॉक्टर अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और हिंसा या धमकी की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था चाहते हैं।
इसके अलावा, चिकित्सकों ने डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (DACP) व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले में केंद्र सरकार और बिहार में लागू व्यवस्था के अनुरूप निर्णय लिया जाना चाहिए। जूनियर डॉक्टरों की समस्याओं, संविदा नियुक्तियों, ट्रेनी रिजर्व पोस्ट (TRP) और मेडिकल छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान भी उनकी मांगों में शामिल है।
महिला डॉक्टरों की सुरक्षा और मातृत्व अवकाश पर जोर
डॉक्टरों ने महिला चिकित्सकों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी प्रमुखता से उठाया है। उनकी मांग है कि महिला डॉक्टरों को नियमानुसार मातृत्व अवकाश की सुविधा मिले और अस्पतालों में सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए।
विशेष रूप से रात की ड्यूटी के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की गई है। इसके साथ ही अस्पतालों के लाइसेंस, पंजीकरण और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने पर जोर दिया गया है।
चिकित्सक संगठनों ने नियमित नियुक्तियों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी करने और ‘झारखंड फर्स्ट’ नीति से जुड़े मुद्दों पर भी स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है।
आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान का मुद्दा उठा
बैठक में आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत अस्पतालों के लंबित भुगतान का मामला भी उठाया गया। चिकित्सक संगठनों ने मांग की कि अस्पतालों को समय पर भुगतान किया जाए और इलाज के विभिन्न पैकेज की दरों की समीक्षा हो।
इसके अलावा, HEM 2.0 से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी व समयबद्ध बनाने की मांग की गई। डॉक्टरों का कहना है कि भुगतान में देरी और प्रशासनिक अड़चनों से अस्पतालों के संचालन पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
15 दिसंबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी
चिकित्सक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें सिर्फ डॉक्टरों की सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं। इनका सीधा संबंध अस्पतालों की कार्यप्रणाली, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने से है।
अब राज्य सरकार के सामने 14 दिसंबर 2026 तक मांगों पर ठोस कार्रवाई करने की चुनौती है। यदि तय समयसीमा तक समाधान नहीं निकला, तो 15 दिसंबर से राज्यभर में कार्य बहिष्कार आंदोलन शुरू हो सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर को लेकर भी चिंता बढ़ सकती है। हालांकि, कार्य बहिष्कार की स्थिति में किन सेवाओं को इससे बाहर रखा जाएगा, इस संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
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