झारखंड हाईकोर्ट ने रांची यूनिवर्सिटी और डोरंडा कॉलेज की दो महिला कर्मचारियों को सेवा नियमित करने का आदेश दिया। कोर्ट ने विश्वविद्यालय के रवैये पर जताई नाराजगी। पूरी खबर पढ़ें।
झारखंड हाईकोर्ट ने रांची यूनिवर्सिटी (Ranchi University) और डोरंडा कॉलेज (Doranda College) में लंबे समय से संविदा (Contract) पर कार्य कर रही दो महिला कर्मचारियों के पक्ष में एक ऐतिहासिक और राहत भरा फैसला सुनाया है। अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सहायक लाइब्रेरियन और कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर दोनों कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से नियमित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, एक कर्मचारी को उनके सेवाकाल के बकाया मानदेय का भुगतान करने का भी आदेश दिया गया है।

न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत द्वारा 14 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए इस फैसले में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी संस्थान में स्थायी प्रकृति का आवश्यक कार्य लंबे समय तक संविदा कर्मचारियों से कराना और फिर उनकी सेवा नियमित करने से इनकार करना पूरी तरह से शोषणकारी रवैया है।
एक दशक से अधिक समय से दे रही थीं सेवाएं
यह पूरा मामला याचिकाकर्ता प्रियंका कुमारी और अनुराधा कुमारी से जुड़ा है, जो डोरंडा कॉलेज में एक दशक से भी अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रही थीं। रिकॉर्ड के अनुसार, प्रियंका कुमारी को जुलाई 2015 में ग्रेड-III के पद पर नियुक्त किया गया था, जिन्हें बाद में सहायक लाइब्रेरियन के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, अनुराधा कुमारी ने अप्रैल 2013 में कॉलेज में योगदान दिया था और उन्हें बाद में कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्यभार सौंपा गया। जब विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनकी सेवाओं को स्थायी नहीं किया गया, तो दोनों महिला कर्मचारियों ने न्याय की गुहार लगाते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात भी आई कि रांची यूनिवर्सिटी ने संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों की सेवा नियमित करने के उद्देश्य से सभी संबंधित कॉलेजों से सूचियां मांगी थीं। इसके जवाब में डोरंडा कॉलेज द्वारा नवंबर 2020 और जनवरी 2021 में विश्वविद्यालय को कर्मचारियों की विधिवत सूची भेजी गई थी, जिसमें इन दोनों याचिकाकर्ताओं के नाम प्रमुखता से शामिल थे। हैरानी की बात यह है कि विश्वविद्यालय ने 21 सितंबर 2021 को ग्रेड-III और ग्रेड-IV के अन्य कई कर्मचारियों की सेवाएं तो नियमित कर दीं, लेकिन इन दोनों के मामलों को लंबित रखा गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
नियुक्ति पत्र को फर्जी बताने पर कोर्ट की कड़ी नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त एक नया मोड़ आया जब डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य ने प्रियंका कुमारी के शुरुआती नियुक्ति पत्र को फर्जी करार देते हुए दावा किया कि कॉलेज के आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है। हालांकि, विश्वविद्यालय द्वारा अदालत में दाखिल किए गए जवाब में कॉलेज द्वारा पूर्व में भेजे गए वे दस्तावेज शामिल थे, जिनमें दोनों कर्मचारियों के नाम और उनके योगदान की तारीखें दर्ज थीं।
इस स्पष्ट विरोधाभास और लापरवाही पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने प्राचार्य को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया। प्राचार्य ने सफाई देते हुए कहा कि संबंधित पत्र कार्यालय में खोजे नहीं मिल सके थे। इस पर अदालत ने बिना किसी पुख्ता रिकॉर्ड की जांच किए अदालत में महत्वपूर्ण तथ्यों पर ऐसा गैर-जिम्मेदाराना दावा करने के लिए कॉलेज प्रशासन के रवैये की तीखी आलोचना की।
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