झारखंड फुटबॉल की कमान प्रदीप वर्मा को, पर वर्चस्व रब्बानी परिवार का

NEWS SAGA DESK

झारखंड फुटबॉल संघ (JFA) की नई कार्यकारिणी का गठन हो गया है। बीजेपी नेता प्रदीप वर्मा को नया अध्यक्ष चुना गया है, जबकि गुलाम रब्बानी परिवार का प्रभाव अब भी कायम है। पढ़ें पूरी विस्तृत रिपोर्ट।

झारखंड के खेल जगत से इस वक्त एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। झारखंड फुटबॉल संघ (JFA) की वार्षिक आम सभा हाल ही में झारखंड के गिरिडीह जिले में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में संघ की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसके तहत राज्य के फुटबॉल प्रशासनिक ढांचे में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। हालांकि, इन बदलावों के बीच भी कुछ ऐसी पुरानी राजनीतिक और पारिवारिक समीकरण की परतें सामने आई हैं, जिन पर खेल प्रेमियों और जानकारों के बीच तीखी चर्चा शुरू हो गई है।

झारखंड के खेल जगत

प्रदीप वर्मा बने नए अध्यक्ष, लेकिन कमान पर सवाल

संघ के इस नए चुनाव में गुमला जिले से ताल्लुक रखने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता प्रदीप वर्मा को झारखंड फुटबॉल संघ (Jharkhand Football Association) का नया अध्यक्ष चुना गया है। अध्यक्ष पद पर एक राजनीतिक चेहरे के आने से संघ की कार्यशैली में नए बदलावों की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन दूसरी ओर चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय खेल प्रेमियों और जानकारों का आरोप है कि इस पूरी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता का घोर अभाव देखा गया। आरोप लगाया जा रहा है कि झारखंड के विभिन्न जिलों के सक्रिय मतदाताओं और फुटबॉल प्रेमियों को इस चुनाव की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। यहाँ तक कि गिरिडीह और पूरे राज्य के मीडिया कर्मियों को भी इस बैठक और चुनाव से पूरी तरह दूर रखा गया, जिससे इसकी निष्पक्षता और वैधता पर संदेह के बादल मंडराने लगे हैं।

बदलाव के बाद भी रब्बानी परिवार का दबदबा कायम

राज्य के गठन के बाद से यानी पिछले 26 वर्षों से लगातार झारखंड फुटबॉल संघ की पूरी कमान और प्रशासनिक नियंत्रण गुलाम रब्बानी के हाथों में ही रहा है। इस बार के चुनाव में ऐसा प्रतीत होता था कि नेतृत्व में बड़ा बदलाव आया है, क्योंकि गुलाम रब्बानी ने खुद प्रत्यक्ष रूप से किसी पद पर रहने से परहेज किया।

लेकिन पर्दे के पीछे की राजनीति ने सबको हैरान कर दिया है। गुलाम रब्बानी ने खुद पद न संभालते हुए अपनी पत्नी शबाना रब्बानी को संघ का नया और शक्तिशाली महासचिव बनवा दिया है। इसके अलावा, उनके साले के बेटे आफताब अहमद को संघ के सबसे अहम वित्तीय पदों में से एक यानी कोषाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस प्रकार, अध्यक्ष पद पर चेहरे के बदलने के बावजूद संघ के तमाम मुख्य और मलाईदार पदों पर रब्बानी परिवार का पुराना प्रभाव पूरी मजबूती के साथ बरकरार है।

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