रैगिंग होने पर छात्र कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी, UGC हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत कर सकते हैं। जानें नियम, प्रक्रिया और जरूरी सावधानियां।
News Saga Desk
कॉलेज और यूनिवर्सिटी में नए छात्रों को परेशान करने या डराने के लिए रैगिंग के मामले सामने आते रहते हैं। इसे रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने संस्थानों के लिए कई नियम बनाए हैं। खास बात यह है कि रैगिंग का मतलब केवल मारपीट करना नहीं है। किसी छात्र को डराना, धमकाना, बेइज्जत करना, मानसिक रूप से परेशान करना या उसकी पढ़ाई में जानबूझकर रुकावट डालना भी रैगिंग के दायरे में आ सकता है।
रैगिंग होने पर कहां करें शिकायत
अगर किसी छात्र के साथ रैगिंग होती है तो वह सबसे पहले अपने कॉलेज या यूनिवर्सिटी की एंटी-रैगिंग कमेटी या सेल में शिकायत कर सकता है। इसके अलावा छात्र राष्ट्रीय एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
नेशनल एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन: 1800-180-5522
ई-मेल: helpline@antiragging.in

ऑनलाइन एंटी-रैगिंग पोर्टल के जरिए भी शिकायत की जा सकती है। शिकायत करने के बाद उसकी स्थिति भी ऑनलाइन देखी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पीड़ित छात्र की जगह उसका दोस्त, परिवार का सदस्य या कोई अन्य व्यक्ति भी शिकायत कर सकता है।
कॉलेज की भी होती है जिम्मेदारी
रैगिंग रोकना सिर्फ छात्रों की जिम्मेदारी नहीं है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी को भी इसके लिए जरूरी व्यवस्था करनी होती है। संस्थानों में एंटी-रैगिंग कमेटी, एंटी-रैगिंग स्क्वॉड और निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए। कॉलेज प्रशासन को कैंपस और हॉस्टल में नजर रखनी होती है। अगर रैगिंग की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच करना और दोषी छात्रों के खिलाफ नियम के मुताबिक कार्रवाई करना संस्थान की जिम्मेदारी है।
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शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान
रैगिंग की घटना होने पर छात्र को घबराने के बजाय जरूरी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए। घटना की तारीख, समय और जगह नोट करें। आरोपी छात्रों की पहचान या नाम पता हो तो उसे भी दर्ज करें। इसके अलावा धमकी भरे मैसेज, फोटो, वीडियो, ऑडियो या दूसरे सबूत सुरक्षित रखें। शिकायत करने के बाद उसका रिकॉर्ड या शिकायत नंबर भी संभालकर रखें। सबसे जरूरी बात यह है कि रैगिंग को मजाक समझकर नजरअंदाज न करें। अगर कोई छात्र लगातार डराने, धमकाने या परेशान करने की कोशिश कर रहा है, तो समय रहते कॉलेज प्रशासन, एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन या जरूरत पड़ने पर पुलिस से मदद लेनी चाहिए।
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