साहिबगंज अवैध खनन केस: ED ने दाखिल की चार्जशीट, 17 करोड़ की रॉयल्टी चोरी का खुलासा

News Saga Desk

साहिबगंज: झारखंड के साहिबगंज जिले में बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और बिना चालान पत्थर परिवहन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानि (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए विशेष न्यायालय (PMLA), रांची में प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दाखिल की है, बता दें की ईडी ने इस मामले में करीब 5.39 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of Crime) को जब्त करने की मांग भी की है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 44 और 45 के तहत की गई है।

इन कंपनियों और निदेशकों को बनाया गया आरोपी

ईडी ने इस मामले में M/s CTS Industries Ltd. सहित उसके निदेशकों और संबंधित कंपनियों को आरोपी बनाया है। आरोपियों में अशोक कुमार तुलस्यान, सिद्धार्थ तुलस्यान, चमन तुलस्यान, पुरुषोत्तम कुमार तुलस्यान तथा M/s Eco Friendly Infra Technology Pvt. Ltd. (EFIT) शामिल हैं।

CBI की FIR के बाद शुरू हुई जांच

ईडी की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई। यह एफआईआर बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती रेलवे साइडिंग में कुछ अज्ञात रेलवे अधिकारियों और M/s CTS Industries Ltd. के खिलाफ दर्ज की गई थी। इसके अलावा पीरपैंती थाना (बिहार) और मिर्जाचौकी थाना (साहिबगंज) में दर्ज अन्य एफआईआर को भी ईसीआईआर में शामिल किया गया।

2015 से अवैध खनन और 251 रेक से ढुलाई

जांच में सामने आया है कि M/s CTS Industries Ltd. और उसके निदेशक वर्ष 2015 से साहिबगंज के जोकमारी क्षेत्र में अवैध रूप से पत्थर खनन और परिवहन कर रहे थे। कंपनी ने पीरपैंती रेलवे साइडिंग से 251 रेलवे रेक के माध्यम से पत्थर भेजा, जो बिना अनिवार्य JIMMS ट्रांसपोर्ट चालान के था।

17 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी चोरी

ईडी के अनुसार, इस अवैध गतिविधि से सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ। जांच में पाया गया कि पत्थर चिप्स में लगभग 11.29 करोड़ रुपये और बोल्डर में करीब 5.94 करोड़ रुपये की रॉयल्टी चोरी की गई। इस प्रकार कुल रॉयल्टी चोरी का आंकड़ा 17 करोड़ रुपये से अधिक है।

रेलवे अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अवैध परिवहन को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कुछ रेलवे अधिकारियों को रिश्वत दी गई, ताकि बिना दस्तावेजों के रेक को रवाना किया जा सके।

फर्जी कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग

ईडी ने बताया कि अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए फर्जी इनवॉइस और गैर-मौजूद कंपनियों का सहारा लिया गया। M/s DS Bitumix और M/s Karan International के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर करीब 4.87 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, जिससे अवैध धन को वैध रूप देने की कोशिश की गई।

छापेमारी में मिले अहम सबूत

ईडी ने 24 अक्टूबर 2024 को PMLA की धारा 17 के तहत साहिबगंज के जोकमारी स्थित CTS Industries Ltd. परिसर में छापेमारी की थी। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए।

जब्त सामग्री रखने की मिली अनुमति

जब्त दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए ईडी द्वारा दायर आवेदन को PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने 4 अप्रैल 2025 को मंजूरी दे दी।

गवाहों के बयान दर्ज, जांच जारी

ईडी ने इस मामले में कंपनी के निदेशकों, रेलवे अधिकारियों, जिला खनन पदाधिकारी और अन्य गवाहों के बयान PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए हैं। एजेंसी के अनुसार, चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है, लेकिन मामले की जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना है।

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