News Saga Desk
बिहार की राजधानी पटना में विकसित की जा रही नई टाउनशिप का नाम अब ‘पाटलिपुत्र’ होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने फुलवारी शरीफ के नदियावां में आयोजित सहयोग शिविर के दौरान यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पटना की पहचान उसके ऐतिहासिक और गौरवशाली अतीत से जुड़ी है, इसलिए नई टाउनशिप को प्राचीन नाम ‘पाटलिपुत्र’ दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई लोग इस बात को लेकर चर्चा करते हैं कि मगध साम्राज्य की राजधानी का नाम पाटलिपुत्र था और पटना को उसी ऐतिहासिक पहचान से जोड़ा जाना चाहिए। इसी सोच के तहत सरकार ने प्रस्तावित टाउनशिप का नाम पाटलिपुत्र रखने का निर्णय लिया है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि एक समय कंकड़बाग को एशिया की सबसे बड़ी टाउनशिप माना जाता था, लेकिन समय के साथ उसकी पहचान बदल गई। उन्होंने बताया कि नगर विकास मंत्री रहते हुए वहां जल निकासी जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए काफी प्रयास किए गए थे। अब राज्य सरकार आधुनिक सुविधाओं से युक्त नई टाउनशिप विकसित कर रही है, जो पटना के विस्तार और विकास की नई पहचान बनेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी कल्पना केवल वर्तमान पटना तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े और विकसित पटना की है। इसी दृष्टिकोण के तहत नई टाउनशिप का नाम पाटलिपुत्र रखा गया है, जिससे शहर की ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक विकास दोनों को एक साथ जोड़ा जा सके।
गौरतलब है कि पाटलिपुत्र बिहार की राजधानी पटना का प्राचीन नाम रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, लगभग तीन हजार वर्ष पहले इस क्षेत्र में पाटलि के वृक्षों की अधिकता के कारण इसका नाम पहले पाटलिग्राम और बाद में पाटलिपुत्र पड़ा। समय के साथ इसका नाम बदलकर अजीमाबाद भी रखा गया था, लेकिन बाद में यह फिर से पटना के नाम से प्रसिद्ध हो गया। अब सरकार नई टाउनशिप को पाटलिपुत्र नाम देकर इस ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
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