NEWS SAGA DESK
नई दिल्ली : भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से वर्ष 2030 तक 44 लाख से अधिक नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इनमें रूफटॉप सोलर सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता क्षेत्र बनकर उभरेगा। यह जानकारी काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर और नेचुरल रिसोर्सेज डिफेंस काउंसिल इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से किए गए अध्ययन में सामने आई है।
‘ड्राइविंग एनर्जी ट्रांजिशन: वर्कफोर्स, स्किल्स, एंड जेंडर इन इंडियाज रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तकनीकी मार्गदर्शन में तैयार की गई है। अध्ययन वर्ष 2024-25 के दौरान सौर, पवन, जैव ऊर्जा और जलविद्युत क्षेत्रों की कंपनियों के सर्वेक्षण पर आधारित है।
अध्ययन में विभिन्न स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों और उनके व्यवसायीकरण के चरणों में रोजगार की आवश्यकता का आकलन करने के लिए नया एफटीई (फुल टाइम इक्विवेलेंट) गुणांक विकसित किया गया है। इसके माध्यम से उपकरण निर्माण, परियोजना स्थापना और संचालन से जुड़े प्रत्यक्ष रोजगारों का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत स्थापित अक्षय ऊर्जा क्षमता के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। साथ ही देश ने कुल बिजली उत्पादन क्षमता में 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले, वर्ष 2025 में ही हासिल कर लिया है।
रिपोर्ट जारी करते हुए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सफल हरित परिवर्तन के लिए लोगों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण तत्व है। उन्होंने कहा कि भारत ने साबित किया है कि आर्थिक विकास और सतत विकास के लक्ष्य एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। पिछले वर्ष देश ने लगभग 51 गीगावाट सौर और पवन ऊर्जा क्षमता हासिल की और आने वाले वर्षों में इस गति के और तेज होने की उम्मीद है।
सीईईडब्ल्यू के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभा घोष ने कहा कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन, कार्यबल परिवर्तन भी होना चाहिए। यह रोजगार सृजन, कौशल विकास और घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने का बड़ा अवसर है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा का लाभ किसानों, श्रमिकों, परिवारों और उद्यमियों तक पहुंच सकेगा।
वहीं एनआरडीसी इंडिया की कंट्री डायरेक्टर दीपा सिंह बगई ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए स्वच्छ ऊर्जा रोजगार बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से रूफटॉप सोलर परियोजनाएं शहरों, छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित कर सकती हैं।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि सौर और पवन ऊर्जा स्थापना तथा उपकरण निर्माण क्षेत्रों के कुल कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल 11 प्रतिशत है। रूफटॉप सोलर क्षेत्र में महिलाओं की सर्वाधिक 15 प्रतिशत भागीदारी दर्ज की गई। इसके बाद सोलर मॉड्यूल निर्माण में 13 प्रतिशत, फ्लोटिंग सोलर में 12 प्रतिशत और ग्राउंड-माउंटेड सोलर परियोजनाओं में 11 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी है।
रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत 61 प्रतिशत महिलाएं तकनीकी के बजाय मानव संसाधन, लेखांकन और प्रशासन जैसी गैर-तकनीकी भूमिकाओं में कार्यरत हैं।
अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया है कि संचालन एवं रखरखाव तथा उपकरण निर्माण से संबंधित भूमिकाओं में लगभग 13 लाख एफटीई रोजगार सृजित हो सकते हैं। ये रोजगार परियोजनाओं और विनिर्माण इकाइयों के पूरे जीवनकाल तक बने रहने की संभावना रखते हैं।
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