भारतीय घरों में रात को सोने से पहले दूध पीने की आदत काफी पुरानी है। कई परिवारों में बच्चों से लेकर बड़े तक रात में एक गिलास दूध पीना पसंद करते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि गुनगुना दूध पीने से शरीर शांत होता है और नींद जल्दी आती है, जबकि कई लोग बिना गर्म किए ठंडा दूध पीना पसंद करते हैं।
NEWS SAGA DESK:
भारतीय घरों में रात को सोने से पहले दूध पीने की आदत काफी पुरानी है। कई परिवारों में बच्चों से लेकर बड़े तक रात में एक गिलास दूध पीना पसंद करते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि गुनगुना दूध पीने से शरीर शांत होता है और नींद जल्दी आती है, जबकि कई लोग बिना गर्म किए ठंडा दूध पीना पसंद करते हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सोने से पहले ठंडा दूध पीना बेहतर है या गुनगुना? दरअसल, दूध का तापमान अकेले आपकी सेहत या नींद पर कोई बड़ा असर डालता है, ऐसा साबित करने के लिए पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं। हालांकि, कुछ लोगों को गुनगुना दूध रात की आरामदायक दिनचर्या का हिस्सा होने के कारण ज्यादा सुकून दे सकता है।

गुनगुना दूध क्यों पसंद किया जाता है?
रात में गुनगुना दूध पीने की परंपरा के पीछे एक वजह यह भी हो सकती है कि गर्म पेय शरीर और दिमाग को आराम देने वाली bedtime routine का हिस्सा बन जाता है। दूध में ट्रिप्टोफैन जैसे घटक मौजूद होते हैं, जो शरीर में नींद से जुड़े जैविक तंत्र में भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि एक गिलास दूध नींद की दवा की तरह काम करता है। दूध में मौजूद ट्रिप्टोफैन की मात्रा इतनी नहीं होती कि इसे सीधे नींद लाने वाला उपाय माना जाए। कई बार फायदा दूध के तापमान से ज्यादा रात की नियमित और शांत दिनचर्या से जुड़ा हो सकता है।

क्या ठंडा दूध पीना नुकसानदायक है?
अगर आपको ठंडा दूध पीने से किसी तरह की परेशानी नहीं होती तो सिर्फ उसके ठंडे होने की वजह से उसे नुकसानदायक नहीं माना जाता। अभी तक ऐसे पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं जो यह साबित करें कि रात में ठंडा दूध पीने से नींद खराब होती है या गुनगुना दूध हर व्यक्ति के लिए उससे बेहतर होता है।
असल में हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। किसी को ठंडा दूध आसानी से पच सकता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति को रात में ठंडा पेय लेने के बाद पेट में भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है।

दूध का तापमान नहीं, पोषण भी है जरूरी
दूध को केवल नींद से जोड़कर देखना सही नहीं है। यह प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन B2, B12, पोटैशियम और फॉस्फोरस जैसे कई पोषक तत्वों का स्रोत है।
अगर किसी व्यक्ति को दूध आसानी से पच जाता है और उससे कोई परेशानी नहीं होती, तो सीमित मात्रा में इसे डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, स्वस्थ रहने के लिए हर किसी को रात में दूध पीना जरूरी नहीं है। शरीर को जरूरी पोषक तत्व दूसरे खाद्य पदार्थों से भी मिल सकते हैं।

सोने से ठीक पहले न पिएं बहुत ज्यादा दूध
अगर आपको रात में दूध पीने की आदत है तो एक साथ बहुत ज्यादा मात्रा लेने से बचना बेहतर है। सोने के बिल्कुल पहले पेट भरकर खाना या ज्यादा तरल पदार्थ लेना कुछ लोगों में भारीपन या नींद में परेशानी पैदा कर सकता है।
इसलिए जरूरत के मुताबिक सीमित मात्रा में दूध लेना ज्यादा आरामदायक हो सकता है। खासकर जिन लोगों को रात में बार-बार पेशाब आने की समस्या होती है, उन्हें सोने से पहले ज्यादा तरल लेने से बचना चाहिए।

ठंडा दूध बेहतर है या गुनगुना?
अगर केवल तापमान की बात करें तो गुनगुना दूध उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जिन्हें इसे पीने से रात में आराम और सुकून महसूस होता है। लेकिन वैज्ञानिक तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि गुनगुना दूध ठंडे दूध की तुलना में निश्चित रूप से ज्यादा नींद लाता है।
इसलिए दूध का चुनाव आपकी पसंद, पाचन क्षमता और शरीर की प्रतिक्रिया के आधार पर किया जा सकता है। अच्छी नींद के लिए केवल दूध पर निर्भर रहने के बजाय नियमित bedtime, रात में कैफीन से दूरी, सोने से पहले कम स्क्रीन टाइम और शांत वातावरण पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।
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