सिमडेगा में समय पर मजदूरी नहीं मिलने से नगर परिषद के सफाईकर्मियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। कर्मियों ने नियमित भुगतान की मांग की।
सिमडेगा। समय पर मजदूरी का भुगतान नहीं होने से नाराज नगर परिषद के सफाईकर्मियों ने बुधवार को एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। सफाईकर्मियों ने नगर परिषद की सहयोगी संस्था की एजेंसी के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते हुए समय पर मजदूरी भुगतान की मांग की। सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित रही और विभिन्न इलाकों में नियमित सफाई का काम नहीं हो सका।

हर महीने भुगतान में हो रही देरी
सफाईकर्मियों के अनुसार, शहरी क्षेत्र में करीब 70 कर्मी सफाई कार्य में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक महीने की मजदूरी का भुगतान सामान्य तौर पर 8 से 10 तारीख के बीच किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्हें मजदूरी करीब 20 तारीख तक मिलती है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कर्मियों ने बताया कि मजदूरी में देरी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि महीने की शुरुआत में ही घर के कई जरूरी खर्च सामने आ जाते हैं, लेकिन समय पर मजदूरी नहीं मिलने के कारण वे इन खर्चों का भुगतान नहीं कर पाते। पर्व-त्योहार के समय भी भुगतान में देरी होने से कर्मचारियों में नाराजगी और बढ़ जाती है।
किराया और राशन का भुगतान करना मुश्किल
सफाईकर्मियों ने बताया कि समय पर मजदूरी नहीं मिलने का सीधा असर उनके घरेलू बजट पर पड़ता है। कई कर्मचारियों को घर का किराया, राशन का पैसा और बच्चों को स्कूल ले जाने वाले ऑटो चालक का भुगतान करना होता है। मजदूरी समय पर नहीं मिलने के कारण वे इन जरूरी भुगतानों को तय समय पर नहीं कर पाते हैं।
कर्मियों के मुताबिक, भुगतान में देरी के कारण उन्हें कई बार संबंधित लोगों से बातें भी सुननी पड़ती हैं। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से सफाई का काम करते हैं और इसके बदले मिलने वाली मजदूरी उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों का मुख्य सहारा है। इसलिए मजदूरी का भुगतान निर्धारित समय पर किया जाना जरूरी है। सफाईकर्मियों ने दावा किया कि समय पर मजदूरी भुगतान को लेकर एजेंसी और नगर परिषद के अधिकारियों के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में मजदूरी का भुगतान प्रत्येक महीने 8 से 10 तारीख के बीच करने पर सहमति भी बनी थी।
कर्मियों का कहना है कि बैठक में सहमति बनने के बावजूद जमीन पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। कई बार उन्हें तय समय के बाद ही मजदूरी मिलती है। इसी वजह से कर्मचारियों ने अब सांकेतिक हड़ताल के माध्यम से अपनी नाराजगी दर्ज करायी है।
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