नेपाल में दो भूकंप के झटके, 4.5 रही तीव्रता

NEWS SAGA DESK

नेपाल में मंगलवार देर रात और तड़के दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहले भूकंप की तीव्रता 4.5 और दूसरे की 4.2 रही।

काठमांडू। विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे नेपाल में एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने चिंता बढ़ा दी है। उत्तर-पश्चिमी नेपाल में मंगलवार देर रात और बुधवार तड़के दो भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप मापन तथा अनुसंधान केंद्र के अनुसार, पहले भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.5 रही, जबकि दूसरे झटके की तीव्रता 4.2 मापी गयी।

विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे नेपाल

भूकंप के दोनों झटकों का केंद्र मुगु जिले के आसपास बताया गया है। झटके मुगु के अलावा डोल्पा और जुम्ला जिलों में भी महसूस किए गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, भूकंप से किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान पहुंचने की तत्काल सूचना नहीं है।

रात और सुबह महसूस हुए दो झटके

राष्ट्रीय भूकंप मापन तथा अनुसंधान केंद्र के मुताबिक, पहला भूकंप स्थानीय समयानुसार रात करीब 1 बजकर 51 मिनट पर आया। इसकी तीव्रता 4.5 दर्ज की गयी। इसके कुछ घंटे बाद सुबह करीब 4 बजकर 28 मिनट पर दूसरा भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 4.2 थी।

दोनों झटकों के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में चिंता बढ़ गयी। भूकंप का केंद्र मुगु जिले के कलाई क्षेत्र के आसपास बताया गया है। प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। भूकंप के झटके डोल्पा और जुम्ला जिलों में भी महसूस किए गए। इन क्षेत्रों में भी किसी बड़े नुकसान की तत्काल जानकारी सामने नहीं आयी है। भूकंप की तीव्रता बहुत अधिक नहीं होने के बावजूद लगातार दो झटकों के कारण लोगों में चिंता देखी गयी। खासकर उन इलाकों में जहां पहले से प्राकृतिक आपदा के कारण जनजीवन प्रभावित है, वहां प्रशासन के लिए किसी भी अतिरिक्त जोखिम पर नजर रखना महत्वपूर्ण हो गया है।

बाढ़ से अभी नहीं उबरा है नेपाल

नेपाल में 26 अगस्त को भोटेकोशी क्षेत्र में आयी विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचायी थी। बाढ़ के कारण कई इलाकों में लोगों को विस्थापित होना पड़ा और बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हुईं। ऐसे समय में भूकंप के झटकों ने प्रभावित लोगों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहले से ही सड़क, पुल, पेयजल और अन्य बुनियादी ढांचे को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में किसी नए भूकंप या उसके बाद आने वाले झटकों से कमजोर ढांचों पर अतिरिक्त असर पड़ने की आशंका रहती है।

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