करम पूजा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं

करम पूजा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व को प्रकृति संरक्षण, कर्मनिष्ठा, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक बताया।

News Saga Desk

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को देशवासियों को करम पूजा की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, कर्म के प्रति निष्ठा और भाईचारे की भावना से जुड़ा करम पूजा का पर्व देश की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है। राष्ट्रपति ने इस अवसर पर प्रकृति के संरक्षण और समाज में सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दी करम पूजा की शुभकामनाएं

राष्ट्रपति मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देशवासियों को करम पूजा की बधाई दी। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना को मजबूत करता है। साथ ही यह लोगों को अपने कर्म के प्रति निष्ठावान रहने और आपसी भाईचारे के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

करम पूजा

राष्ट्रपति ने कामना की कि करम पूजा का यह पर्व सभी देशवासियों के जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए। उनके संदेश में आदिवासी संस्कृति में प्रकृति, सामाजिक संबंधों और सामुदायिक जीवन के महत्व को रेखांकित किया गया।

प्रकृति और कृषि से गहरा संबंध

करम पूजा प्रकृति, कृषि और लोक जीवन से जुड़ा प्रमुख आदिवासी एवं लोक पर्व है। इस पर्व की परंपराएं ग्रामीण और आदिवासी समाज के जीवन में प्रकृति की भूमिका को दर्शाती हैं। खेती-किसानी पर निर्भर समुदायों के लिए प्रकृति और पर्यावरण का संरक्षण सदियों से जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।

करम पर्व में करम वृक्ष और प्रकृति से जुड़ी मान्यताओं का विशेष महत्व माना जाता है। पर्व के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों, पूजा-अर्चना, गीत-संगीत और सामुदायिक गतिविधियों के माध्यम से लोग अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं। यही वजह है कि करम पूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता से भी जुड़ा पर्व है।

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भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक सद्भाव का संदेश

करम पूजा का संबंध भाई-बहन के प्रेम और पारिवारिक रिश्तों से भी जोड़ा जाता है। पर्व के अवसर पर पारंपरिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। इससे समुदाय के भीतर आपसी मेल-जोल और सामाजिक एकता को बढ़ावा मिलता है।

राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संदेश में इसी सामाजिक भावना को विशेष महत्व दिया। उन्होंने करम पूजा को भाईचारे और सद्भाव की भावना से जुड़ा पर्व बताते हुए इसके व्यापक सामाजिक संदेश की ओर ध्यान आकर्षित किया।

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