गायत्री परिवार 100 वर्ष से विचारों से समाज को जोड़ रहा: योगी

सीएम योगी ने कहा कि गायत्री परिवार 100 वर्षों से विचारों के जरिए समाज को जोड़ रहा है। शिक्षकों से 2047 के विकसित भारत के लिए युवा पीढ़ी को दिशा देने की अपील।

News Saga Desk

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गायत्री परिवार ने विचार और सामाजिक चेतना के बल पर 100 वर्षों की लंबी यात्रा पूरी की है। संगठन ने यज्ञ और भारतीय संस्कृति के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि देश को जातीय खेमों में बंटा हुआ भारत नहीं, बल्कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत चाहिए। जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश राष्ट्र और भारत माता के प्रति अपराध है। मुख्यमंत्री रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

विचारों की ताकत से आगे बढ़ा गायत्री परिवार

कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र के साथ हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया और गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा तथा माता भगवती देवी को नमन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि संगठन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां व्यक्ति से ज्यादा विचार को महत्व दिया गया। पंडित श्रीराम शर्मा चाहते तो संगठन को अपने नाम से आगे बढ़ा सकते थे, लेकिन उन्होंने विचार को प्रधानता दी। उनके अनुसार व्यक्ति के नाम पर खड़े संगठन समय के साथ कमजोर पड़ सकते हैं, जबकि विचार पीढ़ियों तक यात्रा करता है। गायत्री परिवार की एक सदी की साधना इसी बात का प्रमाण है।

तीन संस्थाओं ने जगाई जनचेतना

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1923 में गीता प्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। इन संस्थाओं के कार्यक्षेत्र और रास्ते अलग रहे, लेकिन तीनों ने अपने-अपने तरीके से जनचेतना जगाने और लोगों को सनातन मूल्यों, भारत तथा भारतीयता से जोड़ने का काम किया।

गायत्री

उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में भी समाज को बांटने और समाज को जोड़ने वाली अलग-अलग प्रवृत्तियां सक्रिय थीं। आज भी विभाजनकारी शक्तियां अलग-अलग रूपों में दिखाई देती हैं। ऐसे समय में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें समाज को एकजुट रखने और युवा पीढ़ी को सही दिशा देने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

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शिक्षक जागृत हुआ तो भारत बनेगा विश्व गुरु

योगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युग निर्माता बताया। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक जागृत होकर ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं तो भारत को विश्व गुरु बनने में अधिक समय नहीं लगेगा।

उन्होंने भारतीय आचार्य और गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी परंपरा ने तक्षशिला और नालंदा जैसे ज्ञान केंद्रों को जन्म दिया। चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम और महर्षि सांदीपनि-कृष्ण जैसे उदाहरण भी इसी ज्ञान परंपरा से जुड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के साथ फिर से मजबूत करने की जरूरत है।

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