NEWS SAGA DESK
गुमला : गुमला जिले में लंबे समय से आतंक फैलाने वाले झांगुर गिरोह के मुखिया रामदेव उरांव को पुलिस ने रांची से दबोच लिया है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई पूरी गोपनीयता के साथ की गई। उग्रवादी गतिविधियों के लगातार कमजोर पड़ने के बीच यह गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता मानी जा रही है। रामदेव की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही गुमला, बिशुनपुर, चौनपुर और घाघरा के ग्रामीण इलाकों में लोगों ने राहत महसूस की। वर्षों से रंगदारी, धमकी और हिंसा का सामना कर रहे ग्रामीण, ठेकेदार और खदान संचालक इस कदम को क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में अहम माना जा रहा है। कुख्यात उग्रवादी रामदेव उरांव पर नरसंहार, अपहरण, रंगदारी वसूली, गोलीबारी और आगजनी जैसे 50 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। वर्ष 2002 से सक्रिय इस गिरोह ने कई बड़े हमलों को अंजाम दिया। 20 जनवरी 2025 को घाघरा के देवरागानी में हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद वह फरार चल रहा था। खुफिया इनपुट के आधार पर रांची में चलाए गए विशेष अभियान में उसे गिरफ्तार किया गया। फिलहाल उससे एक सुरक्षित स्थान पर गहन पूछताछ की जा रही है। माना जा रहा है कि पूछताछ के दौरान गिरोह के छिपाए गए हथियारों, फंडिंग नेटवर्क और सक्रिय सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। कभी 30 से ज्यादा हथियारबंद कैडरों के साथ घूमने वाला रामदेव पुलिस की सख्ती और गांवों में बढ़ती मुखबिरी के कारण कमजोर होता गया था। गिरफ्तारी के समय उसके साथ केवल 5–6 लोग ही बचे थे।
रामदेव ने छह शादियां की थीं, जिनमें से कई पत्नियां पुलिस दबाव के बीच रहस्यमय ढंग से लापता हो गईं। उसका देवरागानी स्थित पैतृक घर कुर्की-जब्ती के बाद खंडहर बन चुका है।
स्थानीय लोग इस गिरफ्तारी को गुमला जिले में उग्रवाद के लगभग अंत की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं और उम्मीद जता रहे हैं कि अब क्षेत्र में विकास और शांति का मार्ग और अधिक सहज होगा।
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