बिहार बाढ़ का संकट गहराया, गंगा 7 गेज प्वाइंट पर खतरे के निशान से ऊपर और पुनपुन उफान पर है। 18 जिलों में 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।
बिहार बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। गंगा सात गेज प्वाइंट पर लाल निशान के ऊपर बह रही है, जबकि पुनपुन, दरधा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक और घाघरा जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बिहार के 18 जिलों में बाढ़ का पानी फैल चुका है और 6.65 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

पटना और भागलपुर इस समय सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। पटना में गंगा के साथ पुनपुन नदी के बढ़ते जलस्तर पर विशेष नजर रखी जा रही है। वहीं, भागलपुर में गंगा के तेज बढ़ाव के कारण तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। जल संसाधन विभाग ने संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी और जरूरी संसाधन तैयार रखने के निर्देश दिए हैं।
गंगा सात गेज प्वाइंट पर खतरे के निशान से ऊपर
बिहार बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चिंता गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। राज्य के सात प्रमुख गेज प्वाइंट पर नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से 178 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज की गई, जबकि हाथीदह में यह स्तर 153 सेंटीमीटर और दीघा में 127 सेंटीमीटर ऊपर रहा। बक्सर में गंगा 19 सेंटीमीटर, मुंगेर में 9 सेंटीमीटर, भागलपुर में 32 सेंटीमीटर और कहलगांव में 82 सेंटीमीटर खतरे के निशान से ऊपर बताई गई है। भागलपुर में पिछले 24 घंटे के दौरान गंगा का जलस्तर 46 सेंटीमीटर बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, नदी यहां करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही है। इस बढ़ाव के कारण भागलपुर के राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति की निगरानी के लिए पटना मुख्यालय से वरिष्ठ इंजीनियरों की टीम भी भेजी गई है।
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पुनपुन नदी ने बढ़ाई पटना की चिंता
पटना में गंगा के साथ पुनपुन नदी का बढ़ता जलस्तर भी चिंता का प्रमुख कारण बन गया है। श्रीपालपुर में पुनपुन का जलस्तर 53.16 मीटर दर्ज किया गया, जो 50.60 मीटर के खतरे के निशान से करीब 2.57 मीटर अधिक है।पिछले 24 घंटे में पुनपुन का जलस्तर 28 सेंटीमीटर बढ़ा है। नदी के बढ़ते पानी का सबसे ज्यादा असर निचले इलाकों में देखा जा रहा है। कई गांव पानी से घिर गए हैं और ग्रामीणों का सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। पुनपुन की सहायक नदी दरधा भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। ऐसे में पटना के निचले इलाकों में जलजमाव और बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर ने 1976 की बड़ी बाढ़ की याद भी ताजा कर दी है, हालांकि मौजूदा स्थिति की तुलना सीधे उस ऐतिहासिक बाढ़ से करना उचित नहीं होगा।
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