सोशल मीडिया पर जहां आज की युवा पीढ़ी नए गानों और डांस ट्रेंड के साथ रील बना रही है, वहीं बिहार का पारंपरिक लोकनृत्य झिझिया भी युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहा है
NEWS SAGA DESK
सोशल मीडिया पर जहां आज की युवा पीढ़ी नए गानों और डांस ट्रेंड के साथ रील बना रही है, वहीं बिहार का पारंपरिक लोकनृत्य झिझिया भी युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बन रहा है। कभी मिथिलांचल के गांवों और नवरात्रि उत्सवों तक सीमित रहने वाली यह लोककला अब दुर्गा पूजा पंडालों और सांस्कृतिक मंचों पर नई पहचान बना रही है। खास बात यह है कि बच्चे और युवा मैथिली लोकगीतों पर झिझिया प्रस्तुत कर अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
सिर पर रोशन घड़ा और लोकगीतों की अनोखी धुन
झिझिया बिहार के मिथिलांचल की सदियों पुरानी लोकनृत्य परंपरा है। इसे खासतौर पर शारदीय नवरात्रि के दौरान प्रस्तुत किया जाता है। इसमें महिलाएं और युवतियां सिर पर छेद वाला मिट्टी का घड़ा रखती हैं, जिसके अंदर दीपक जलाया जाता है। रोशनी से जगमगाते घड़े को संतुलित रखते हुए समूह में नृत्य करना इस कला की खास पहचान है। इसके लिए अभ्यास, तालमेल और संतुलन की जरूरत होती है।
मान्यताओं के अनुसार, झिझिया को मां दुर्गा और ब्रह्म बाबा की आराधना से जोड़ा जाता है। इसके गीतों में देवी-देवताओं का स्मरण और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना देखने को मिलती है। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है।
Gen Z को क्यों भा रही है यह परंपरा?
पारंपरिक वेशभूषा, रोशनी से चमकते घड़े और मैथिली गीतों का अनोखा संगम झिझिया को खास बनाता है। मुजफ्फरपुर के दुर्गा पूजा पंडालों में बच्चों की प्रस्तुतियों से लेकर पूर्णिया में आयोजित प्रशिक्षण कार्यशालाओं और शिवहर में युवतियों की भागीदारी तक, कई जगह इस लोककला को आगे बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। झिझिया को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया की भी अहम भूमिका हो सकती है। हालांकि, इसकी लोकप्रियता में व्यापक बढ़ोतरी को लेकर ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं।
लोककला को बचाने में युवाओं की भूमिका अहम
झिझिया की परंपरा को जीवित रखने के लिए स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक संस्थानों में प्रशिक्षण व प्रस्तुतियों को बढ़ावा देना जरूरी है। युवा अगर इसके गीत, इतिहास और नृत्य शैली को सीखकर आगे बढ़ाएं, तो बिहार की यह विरासत नई पीढ़ियों तक पहुंच सकती है। झिझिया साबित करता है कि आधुनिकता के बीच भी अपनी जड़ों से जुड़ाव कायम रखा जा सकता है।
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