हिमाचल में एचआरटीसी कर्मियों का चक्का जाम ऐलान, आधी रात से थम सकते हैं सरकारी बसों के पहिए

NEWS SAGA DESK

सरकार के साथ वार्ता विफल होने के बाद यूनियन का बड़ा फैसला; लंबित वित्तीय देनदारियों और प्रदेशाध्यक्ष के तबादले को लेकर बढ़ा विवाद

हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बुधवार आधी रात के बाद गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के चालक-परिचालक कर्मचारियों ने सरकार के साथ हुई वार्ता विफल होने के बाद प्रदेशव्यापी चक्का जाम का ऐलान कर दिया है। यूनियन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कर्मचारियों की लंबित वित्तीय मांगों पर ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया तथा प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर के तबादले का आदेश वापस नहीं हुआ, तो आंदोलन जारी रहेगा।

यूनियन के इस फैसले से राज्यभर में लाखों यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। एचआरटीसी की बसें प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने का प्रमुख माध्यम हैं। ऐसे में यदि चक्का जाम लागू होता है तो आम लोगों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

मंगलवार को सचिवालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) के साथ बैठक आयोजित की गई थी। यूनियन नेताओं का दावा है कि उन्हें पहले उपमुख्यमंत्री के साथ वार्ता का आश्वासन दिया गया था। हालांकि सचिवालय पहुंचने पर उन्हें बताया गया कि उपमुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द कर दी गई है और बातचीत अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) के साथ ही होगी।

यूनियन के अनुसार बैठक के दौरान सबसे पहले प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर के तबादले का मुद्दा उठाया गया। कर्मचारियों ने इस आदेश को वापस लेने की मांग की, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद यूनियन प्रतिनिधियों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया।

प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने प्रेस से बातचीत में कहा कि बुधवार रात 12 बजे के बाद कर्मचारी बसों का संचालन बंद कर देंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अग्रिम टिकट बुकिंग कराने से बचें और बसों के संचालन की उम्मीद में इंतजार न करें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को मजबूरी में यह कदम उठाना पड़ रहा है क्योंकि लंबे समय से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यूनियन का आरोप है कि एचआरटीसी के करीब 12 हजार कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण वित्तीय मांगें वर्षों से लंबित हैं। कर्मचारियों के अनुसार 75 महीने का नाइट ओवरटाइम एरियर अब तक नहीं दिया गया है। इसके अलावा वर्ष 2016 से लंबित वेतन संशोधन का एरियर, महंगाई भत्ते की देनदारियां, 4-9-14 वेतनमान का लाभ, वर्दी भत्ता तथा अन्य वित्तीय मामलों का निपटारा भी नहीं हुआ है।

यूनियन का दावा है कि केवल नाइट ओवरटाइम एरियर के रूप में ही लगभग 150 करोड़ रुपये कर्मचारियों को मिलने बाकी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित भुगतान के कारण उनके परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा पदोन्नति प्रक्रिया भी वर्षों से रुकी हुई है, जिससे कर्मचारियों में निराशा बढ़ी है। विभिन्न श्रेणियों में भर्तियां नहीं होने से कार्यभार भी लगातार बढ़ रहा है।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें हर महीने समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि आर्थिक अस्थिरता के कारण कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है और निगम के संचालन पर भी इसका असर पड़ रहा है।

विवाद को और गहरा करने वाला मुद्दा यूनियन प्रदेशाध्यक्ष मान सिंह ठाकुर का हालिया तबादला है। तीन दिन पहले उन्हें शिमला की ढली लोकल यूनिट से चंबा यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया था। निगम प्रबंधन ने इसे प्रशासनिक और जनहित में लिया गया निर्णय बताया है, लेकिन यूनियन ने इसे आंदोलन को कमजोर करने और कर्मचारियों की आवाज दबाने का प्रयास करार दिया है।
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मान सिंह ठाकुर लंबे समय से कर्मचारियों की मांगों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने वेतन, भत्तों, पदोन्नति और वित्तीय देनदारियों के मुद्दे लगातार सरकार और निगम प्रबंधन के सामने उठाए हैं। यूनियन का कहना है कि ऐसे समय में जब कर्मचारियों का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है, तब प्रदेशाध्यक्ष का तबादला कई सवाल खड़े करता है।

इस बीच एचआरटीसी टेक्निकल यूनियन और पेंशनर्स जॉइंट एक्शन कमेटी ने भी चालक-परिचालक यूनियन के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। इससे आंदोलन और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

यदि सरकार और यूनियन के बीच जल्द कोई समाधान नहीं निकलता है, तो प्रदेशभर में बस सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे न केवल यात्रियों को परेशानी होगी, बल्कि पर्यटन, व्यापार और दैनिक आवागमन पर भी असर पड़ सकता है। अब सभी की नजरें सरकार और यूनियन के अगले कदम पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि सार्वजनिक हित को देखते हुए दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचने का प्रयास करेंगे, ताकि प्रदेश में परिवहन व्यवस्था सुचारू बनी रहे और कर्मचारियों की समस्याओं का भी समाधान हो सके।

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