JNU पीएचडी दाखिले में आरक्षण विवाद, जांच के लिए बनी 5 सदस्यीय कमेटी

NEWS SAGA DESK

JNU PhD Admission Reservation News: जेएनयू ने पीएचडी एडमिशन में SC, ST और PwBD आरक्षण से जुड़ी शिकायतों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी गठित की है। जानें कमेटी का काम, सदस्यों के नाम और छात्र संगठनों के आरोप।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी (PhD) एडमिशन में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और दिव्यांग (PwBD) श्रेणी के आरक्षण नियमों के पालन में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, यह कदम छात्र संगठनों की ओर से सीटों के आवंटन में दी गई शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों के बाद उठाया गया है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय

यूनिवर्सिटी द्वारा गठित इस कमेटी का प्राथमिक कार्य पीएचडी दाखिले के दौरान जारी की गई सीट मैट्रिक्स (Seat Matrix) और आरक्षण नियमों की बारीकी से समीक्षा करना है। कमेटी यह जांच करेगी कि:

  • क्या सरकार द्वारा निर्धारित 7.5% ST, 15% SC और PwBD आरक्षण नीतियों का सही तरीके से पालन हुआ है या नहीं।
  • विभिन्न विभागों और अध्ययन केंद्रों (Schools/Centres) में सीटों के आवंटन के दौरान कहां चूक हुई।
  • छात्र संगठनों और राष्ट्रीय आयोगों द्वारा उठाए गए सवालों व आंकड़ों की सत्यता की जांच कर विश्वविद्यालय प्रशासन को सुधारात्मक सिफारिशें सौंपना।
कमेटी में कौन-कौन हैं शामिल?

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 5 सदस्यीय कमेटी का ढांचा इस प्रकार है:

  1. अध्यक्ष: प्रोफेसर विवेक कुमार (डीन, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज)
  2. सदस्य: जेएनयू के एसटी (ST) संपर्क अधिकारी
  3. सदस्य: समान अवसर कार्यालय (Equal Opportunity Office) के मुख्य सलाहकार
  4. सदस्य: उप रजिस्ट्रार (कानूनी / Legal)
  5. सदस्य-सचिव: एससी/एसटी/ओबीसी सेल के सहायक रजिस्ट्रार

अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि आवश्यक हुआ, तो कमेटी जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए अन्य विशेषज्ञों को भी शामिल कर सकती है।

711 सीटों में सीटों की कमी का आरोप

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अन्य छात्र समूहों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएचडी की कुल 711 सीटों में आरक्षण के मानकों की अनदेखी की है:

  • ST वर्ग: 7.5% संवैधानिक आरक्षण के तहत एसटी वर्ग को 53 सीटें मिलनी चाहिए थीं, लेकिन केवल 38 सीटें ही आवंटित की गईं (15 सीटों की कमी का आरोप)।
  • SC वर्ग: नियमानुसार करीब 107 सीटें आवंटित होनी चाहिए थीं, जबकि केवल 103 सीटें ही दर्शाई गईं (4 सीटों का अंतर)।
  • PwBD वर्ग: दिव्यांगजनों के लिए 36 सीटों के स्थान पर केवल 17 सीटें आवंटित करने का दावा किया गया है।
JNUSU और राष्ट्रीय आयोगों का रुख

इस पूरे घटनाक्रम पर जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) ने मांग की है कि जांच को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए गठित कमेटी में छात्र प्रतिनिधियों को भी स्थान दिया जाए।

दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जेएनयू प्रशासन से विस्तृत जवाब मांगा है। इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने भी विश्वविद्यालय के समान अवसर कार्यालय को इस पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।

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