रांची से लापता जुड़वां भाइयों करण और अर्जुन के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में पता चला कि बच्चे समुद्र देखने पुरी चले गए थे। अर्जुन बरामद हो गया है, जबकि करण और उनका साथी शिवा अभी फरार हैं।
News Saga Desk
रांची। राजधानी रांची से रहस्यमय तरीके से लापता हुए जुड़वां भाइयों ‘करण और अर्जुन’ के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जिस घटना को अब तक अपहरण या किसी बड़ी साजिश से जोड़कर देखा जा रहा था, वह पुलिस जांच में पूरी तरह अलग निकली। रांची पुलिस ने ओडिशा के पुरी से लापता बच्चों में से एक अर्जुन को सकुशल बरामद कर लिया है। हालांकि उसका भाई करण और उनका साथी शिवा अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
जानकारी के अनुसार, 1 जून 2026 को जुड़वां भाई करण और अर्जुन अपने घर से निकले थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। परिजनों ने रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर काफी खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद धुर्वा थाना में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने बच्चों का सुराग देने वाले के लिए 50 हजार रुपये के नकद इनाम की भी घोषणा की थी।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने शहर के विभिन्न इलाकों और रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच में पता चला कि दोनों बच्चे ओडिशा जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे। इसके बाद रांची पुलिस की विशेष टीम तुरंत पुरी रवाना हुई और स्थानीय पुलिस की मदद से बच्चों का पता लगाया।
पुलिस पूछताछ में अर्जुन ने जो कहानी बताई, उसने सभी को हैरान कर दिया। उसने बताया कि वह, उसका भाई करण और उनका दोस्त शिवा समुद्र देखने की इच्छा रखते थे। इसी वजह से तीनों ने बिना किसी को बताए घर छोड़ने की योजना बनाई और पुरी पहुंच गए। वहां वे कई दिनों तक समुद्र तट और जगन्नाथ मंदिर के आसपास घूमते रहे।
बच्चों ने बताया कि शुरुआती दिनों में वे अपने साथ लाए पैसों से खर्च चला रहे थे, लेकिन पैसे खत्म होने के बाद उन्हें भोजन के लिए लोगों से मदद मांगनी पड़ी। इस दौरान पुरी रेलवे स्टेशन पर रेलवे पुलिस (GRP) को उन पर शक भी हुआ था। पूछताछ के दौरान बच्चों ने खुद को अनाथ और पुरी का निवासी बताकर पुलिस को गुमराह कर दिया, जिसके कारण उनकी असली पहचान सामने नहीं आ सकी।
रांची पुलिस जब बच्चों तक पहुंची और पूछताछ कर रही थी, तभी करण और शिवा वहां से भाग निकले। फिलहाल अर्जुन पुलिस की निगरानी में है, जबकि करण और शिवा की तलाश के लिए लगातार छापेमारी और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों के कथित अपहरण की आशंका गलत थी। हालांकि बच्चों का इतने दिनों तक घर से दूर रहना और पुलिस को भी चकमा देना सुरक्षा व्यवस्था और अभिभावकीय सतर्कता से जुड़े कई सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि शेष दोनों बच्चों को जल्द ढूंढ लिया जाएगा और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
No Comment! Be the first one.