News Saga Desk
नेपाल की बालेन सरकार ने मई 2026 से भारतीय यात्रियों और भारतीय नंबर वाले वाहनों के लिए नए सख्त बॉर्डर नियम लागू कर दिए हैं। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य तस्करी पर रोक लगाना और सीमा क्षेत्रों में आवाजाही को नियंत्रित करना है। नए नियम लागू होने के बाद भारत-नेपाल सीमा पर निगरानी और जांच पहले से अधिक कड़ी कर दी गई है।
पहचान पत्र रखना अब अनिवार्य
नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों को अब वैध पहचान पत्र साथ रखना जरूरी होगा। आधार कार्ड, वोटर आईडी या अन्य सरकारी पहचान पत्र के बिना सीमा पार करने में परेशानी हो सकती है। सीमा चौकियों पर दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
100 नेपाली रुपये से अधिक सामान पर लगेगा भंसार
नेपाल सरकार ने भारत से ले जाए जाने वाले सामान पर भी सख्ती बढ़ाई है। अब 100 नेपाली रुपये से अधिक मूल्य के सामान पर कस्टम ड्यूटी यानी “भंसार” देना होगा। इसमें कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं भी शामिल हैं।
पहले सीमा क्षेत्र के लोग छोटे-मोटे सामान की खरीदारी आसानी से कर लेते थे, लेकिन नए नियमों के बाद अब उन्हें भी शुल्क देना पड़ सकता है।
भारतीय वाहनों के लिए परमिट जरूरी
नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नंबर के कार और बाइक चालकों को अब बॉर्डर पर विशेष परमिट लेना अनिवार्य होगा। वाहन की एंट्री रजिस्ट्रेशन भी करानी होगी।
अब भारत सहित अन्य देशों के वाहन एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 30 दिन तक ही नेपाल में रह सकेंगे। तय अवधि पूरी होने के बाद वाहन को वापस ले जाना होगा, अन्यथा उसे जब्त किया जा सकता है।
हालांकि, यह नियम मालवाहक वाहनों पर लागू नहीं होगा। यदि पर्यटक 30 दिन से अधिक नेपाल में रहना चाहते हैं, तो उन्हें वाहन बदलना होगा।
यह व्यवस्था पहले भी कुछ सीमा नाकों पर लागू थी, लेकिन ऑनलाइन भंसार प्रणाली न होने के कारण वाहनों की निगरानी मुश्किल थी। अब डिजिटल सिस्टम लागू होने से वाहनों की आवाजाही का पूरा डेटा भंसार कार्यालय में उपलब्ध रहेगा।
भैरहवा भंसार कार्यालय के प्रमुख हरिहर पौडेल के अनुसार, भारतीय पर्यटक वाहन एक वर्ष में अधिकतम 30 दिन तक ही नेपाल में रह सकेंगे। इस अवधि के दौरान वाहन मालिक अपनी सुविधा के अनुसार कई बार नेपाल आ-जा सकते हैं।
सीमावर्ती बाजारों के लिए 12 घंटे की विशेष सुविधा
सीमावर्ती नेपाली बाजारों तक आने-जाने वाले भारतीय कार, जीप और बाइक चालकों को 12 घंटे की विशेष सुविधा दी गई है। इस अवधि के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और इस श्रेणी के वाहनों पर 30 दिन वाली सीमा लागू नहीं होगी।
भारतीय वाहन सुविधा पास लेकर बेलहिया, भैरहवा, महेशपुर, नवलपरासी, कृष्णानगर और मर्जादपुर जैसे सीमावर्ती नेपाली बाजारों तक पहले की तरह आ-जा सकेंगे। इसी तरह नेपाली वाहनों को भी भारत के नजदीकी रेलवे स्टेशनों तक आने-जाने की अनुमति रहेगी।
नेपाल में भारतीय वाहनों के लिए निर्धारित शुल्क
नेपाल में सामान लेकर जाने वाले भारतीय मालवाहक वाहनों से 1700 नेपाली रुपये (करीब 1062 भारतीय रुपये) शुल्क लिया जाएगा। उन्हें दो दिन के भीतर वापस लौटना होगा।
सामान लेकर नेपाल जाने वाले अन्य भारतीय वाहनों के लिए 1500 नेपाली रुपये (करीब 937 भारतीय रुपये) शुल्क तय किया गया है। यदि मालवाहक वाहन 72 घंटे के भीतर नेपाल छोड़ देते हैं, तो अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन 72 घंटे से अधिक रुकने पर प्रतिदिन 2500 नेपाली रुपये (करीब 1562 भारतीय रुपये) अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
पर्यटक वाहनों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से 600 नेपाली रुपये (करीब 375 भारतीय रुपये) भंसार शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा परमिट शुल्क अलग से देना होगा।
- बस: 1000 नेपाली रुपये प्रतिदिन
- मिनी बस: 700 नेपाली रुपये प्रतिदिन
- कार: 300 नेपाली रुपये प्रतिदिन
सीमा क्षेत्र के लोगों की बढ़ी परेशानी
नए नियमों का सबसे अधिक असर सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की खरीदारी और आवागमन अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है। लोगों का कहना है कि छोटे सामान पर भी ड्यूटी लगाए जाने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नेपाल सरकार का क्या है उद्देश्य?
नेपाल सरकार का कहना है कि इन नियमों का मकसद अवैध व्यापार, तस्करी और अनियंत्रित आवाजाही पर रोक लगाना है। हालांकि, सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के बीच इन नियमों को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।
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