महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज, JMM का भाजपा पर हमला

News Saga Desk

सदन में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद विपक्ष का भाजपा पर हमला लगातार तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस वार्ता में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन लागू करने की “साजिश” अब उजागर हो चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “चोर कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई क्लू छोड़ ही देता है, जिससे वह पकड़ा जाता है,” और भाजपा की स्थिति आज वैसी ही हो गई है।

सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि यदि परिसीमन के तहत विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी की जाएगी, तो राज्यसभा की सीटें क्यों नहीं बढ़ाई जा रहीं। उन्होंने इसे सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करने वाला कदम बताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण बिल के जरिए महिलाओं को आगे रखकर परिसीमन लागू करना चाहती है, जो देश को मंजूर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना जनगणना, ओबीसी कोटा तय किए और सरना धर्म कोड लागू किए बिना परिसीमन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भट्टाचार्य ने कहा कि देश के सभी राजनीतिक दल महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के पक्ष में हैं, लेकिन उन्होंने केंद्र सरकार से सवाल किया कि दिसंबर 2023 में संविधान संशोधन के जरिए पारित महिला आरक्षण बिल को अब तक लागू क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि जब पूर्ण बहुमत वाली सरकार उस समय बिल लागू नहीं कर सकी, तो अब दोबारा संविधान संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। उनके अनुसार, यह कदम बिना जनगणना के परिसीमन लागू करने की कोशिश का हिस्सा है, जिसका विपक्ष विरोध करेगा।

इसके साथ ही उन्होंने रक्षामंत्री के बयान को “हास्यास्पद” बताते हुए कहा कि 2024 के चुनाव में भाजपा को देश के केवल 38 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला, जबकि 62 प्रतिशत जनता ने उसे नकार दिया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए और ईवीएम को लेकर आरोप लगाए।

JMM ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ईमानदार है, तो उसे दिसंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को ही लागू करना चाहिए, जिसे देशभर में स्वीकार्यता प्राप्त है।

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