रबीन्द्र नाथ महतो

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन से रांची लौटे रबीन्द्र नाथ महतो

News Saga Desk

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन से रांची लौटे स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो। केपटाउन में दिव्यांग समावेशन और जलवायु अनुकूलन पर रखे अहम विचार।

रांची: झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद शुक्रवार, 18 सितंबर को रांची लौट आए। वह दिल्ली होते हुए दोपहर करीब 2:15 बजे रांची पहुंचे। सम्मेलन में झारखंड विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने समावेशी लोकतंत्र, दिव्यांगजनों की संसदीय एवं लोकतांत्रिक भागीदारी के साथ-साथ जलवायु अनुकूलन और उससे जुड़ी चुनौतियों पर अपने विचार दुनिया के विभिन्न देशों से आए सांसदों और विधानमंडलों के प्रतिनिधियों के सामने रखे।

रबीन्द्र नाथ महतो डेलीगेट के रूप में सम्मेलन में शामिल हुए थे। उनके साथ झारखंड विधानसभा के सदस्य मथुरा प्रसाद महतो और दशरथ गागराई ऑब्जर्वर के रूप में सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 9 सितंबर को रांची से रवाना हुए थे। विधानसभा अध्यक्ष अपने निर्धारित कार्यक्रम और व्याख्यान के बाद लौट आए हैं, जबकि दोनों ऑब्जर्वर के 20 सितंबर को रांची लौटने का कार्यक्रम है।

रांची

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में इन विषयों पर रखे विचार

69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के दौरान आयोजित अलग-अलग सत्रों और कार्यशालाओं में विधानसभा अध्यक्ष ने हिस्सा लिया। उन्होंने Workshop-B ‘Accessible Parliaments: Inclusion for People with Disabilities’ और Workshop-C ‘Parliamentary Leadership in Climate Adaptation and Resilience’ में झारखंड और भारत के अनुभवों को साझा किया।

समावेशी संसद से जुड़े विषय पर उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन लोकतंत्र में केवल लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि वे नागरिक, मतदाता, प्रतिनिधि, नेता और निर्णयकर्ता भी हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं को उनके लिए पूरी तरह सुलभ बनाना जरूरी है।

उन्होंने भारत में दिव्यांगजनों की लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने के लिए यूनिक डिसेबिलिटी आईडी यानी UDID, सुगम्य भारत अभियान और चुनाव प्रक्रिया में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सुलभ संसद को समावेशी लोकतंत्र की एक आवश्यक शर्त बताया।

झारखंड विधानसभा के अनुभव भी किए साझा

अपने संबोधन में रबीन्द्र नाथ महतो ने झारखंड में वर्ष 2024 के चुनाव के दौरान दिव्यांग मतदाताओं के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं का जिक्र किया। उन्होंने घर से मतदान की सुविधा और जरूरतमंद मतदाताओं को मतदान केंद्र तक वाहन के जरिए पहुंचाने जैसे प्रयासों की जानकारी सम्मेलन में मौजूद प्रतिनिधियों के साथ साझा की।

सम्मेलन के Workshop-C में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष को भारत की ओर से लीड स्पीकर की जिम्मेदारी भी दी गई। उनके सुझावों को सम्मेलन के रिकॉर्ड में अनुशंसा के लिए दर्ज किया गया। झारखंड विधानसभा के लिए इसे अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंच पर राज्य के अनुभव और प्राथमिकताओं को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

जलवायु अनुकूलन को विकास और आजीविका से जोड़ने पर जोर

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के Workshop-C में ‘Parliamentary Leadership in Climate Adaptation and Resilience’ विषय पर बोलते हुए रबीन्द्र नाथ महतो ने जलवायु अनुकूलन को केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा मानने के बजाय इसे विकास, जनसुरक्षा और आजीविका की रक्षा से जोड़ने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने अनियमित वर्षा, जल संकट और बढ़ती गर्मी जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, पूर्व तैयारी और जलवायु-सहनीय आधारभूत संरचना विकसित करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, सहनशीलता यानी Resilience विकास में बाधा नहीं, बल्कि बेहतर और टिकाऊ विकास की आधारशिला है। उन्होंने संसदों को केवल बहस के सदन तक सीमित न रखते हुए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयारी करने वाले संस्थानों के रूप में विकसित करने की बात कही।

झारखंड की परिस्थितियों को वैश्विक मंच पर रखा

विधानसभा अध्यक्ष ने झारखंड की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को भी 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में प्रमुखता से रखा। उन्होंने राज्य के वन, जल, कृषि और खनिज संसाधनों के साथ आदिवासी समुदायों की आजीविका के संबंध का उल्लेख किया।

उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से इन क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार जलवायु अनुकूलन की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया। साथ ही कहा कि कानून, बजट, निगरानी और प्रभावी जनप्रतिनिधित्व के माध्यम से जलवायु संबंधी प्रयासों को अधिक मजबूत किया जा सकता है।

राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन अलग-अलग देशों और विधानमंडलों के प्रतिनिधियों को संसदीय अनुभवों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनहित से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार साझा करने का मंच प्रदान करता है। झारखंड राष्ट्रमंडल संसदीय संघ शाखा की भागीदारी से राज्य के प्रतिनिधिमंडल को अपने अनुभवों और प्राथमिकताओं को वैश्विक संसदीय विमर्श के सामने रखने का अवसर मिला।

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इस भागीदारी का प्रभाव झारखंड विधानसभा की भविष्य की कार्यप्रणाली में भी देखने को मिल सकता है। सम्मेलन में सामने आई श्रेष्ठ संसदीय कार्यप्रणालियों और दूसरे देशों के अनुभवों का अध्ययन राज्य विधानसभा के लिए उपयोगी हो सकता है।

Rabindra Nath Mahato

सम्मेलन को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस मंच ने विभिन्न देशों और विधानमंडलों के प्रतिनिधियों के बीच संसदीय अनुभवों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और जनहित के समसामयिक विषयों पर विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन से प्राप्त अनुभवों, विचारों और श्रेष्ठ संसदीय कार्यप्रणालियों को झारखंड विधानसभा की कार्यप्रणाली में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि सदन की कार्यवाही को अधिक प्रभावी, समावेशी और जनोन्मुख बनाया जा सके।

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इस सम्मेलन में झारखंड की ओर से दिव्यांग मतदाताओं की सुविधाओं, समावेशी लोकतंत्र, जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, कृषि, ग्रामीण आजीविका और टिकाऊ आधारभूत संरचना जैसे सीधे जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए गए। आने वाले समय में सम्मेलन से प्राप्त संसदीय अनुभवों को झारखंड विधानसभा की कार्यप्रणाली में किस रूप में शामिल किया जाता है, इस पर नजर रहेगी।

वहीं, सम्मेलन में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल विधायक मथुरा प्रसाद महतो और दशरथ गागराई 20 सितंबर को रांची लौटेंगे।

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