एसआरएफटीआई हिंसा: जांच के लिए बंगाल सरकार ने बनाई एसआईटी

एसआरएफटीआई हिंसा मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने छह सदस्यीय एसआईटी गठित की है। कुणाल अग्रवाल करेंगे जांच का नेतृत्व, एक अक्टूबर तक पहली रिपोर्ट देने का निर्देश।

News Saga Desk

कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (एसआरएफटीआई) में हुई हिंसक झड़प के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने जांच तेज कर दी है। संस्थान परिसर में छात्रों, शिक्षकों और एक संगठन के सदस्यों के बीच हुए विवाद की पड़ताल के लिए राज्य सरकार ने छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। इस जांच दल की अगुवाई कोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा के प्रमुख कुणाल अग्रवाल करेंगे। राज्य सरकार ने एसआईटी को एक अक्टूबर तक अपनी पहली जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद संस्थान में हुई हिंसा से जुड़े घटनाक्रम और दोनों पक्षों के आरोपों की विस्तृत जांच की जाएगी।

राज्य के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, एसआरएफटीआई में हुई घटना को लेकर पंचसायर थाने में दर्ज तीन प्राथमिकियों के आधार पर जांच की जाएगी। एसआईटी में कोलकाता पुलिस और राज्य सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। सरकार ने जांच दल को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मदद लेने की अनुमति भी दी है। यह मामला संस्थान परिसर में बाहरी संगठन की बैठक आयोजित करने और उसके विरोध में छात्रों के प्रदर्शन के बाद हुई हिंसा से जुड़ा है।

एसआरएफटीआई हिंसा की जांच के लिए छह सदस्यीय एसआईटी गठित

पश्चिम बंगाल सरकार ने एसआरएफटीआई में हुई हिंसक झड़प की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल का गठन किया है। छह सदस्यीय इस टीम का नेतृत्व कोलकाता पुलिस की खुफिया शाखा के प्रमुख कुणाल अग्रवाल को सौंपा गया है। जांच दल में पुलिस और सीआईडी के अधिकारियों को शामिल किया गया है, ताकि घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा सके।

राज्य के गृह विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, कुणाल अग्रवाल के अलावा कोलकाता पुलिस के खुफिया विभाग की डीसी स्पर्श नीलांगी और राज्य सीआईडी के डीएसपी स्तर के अधिकारी कौशिक घोष भी एसआईटी का हिस्सा होंगे। इनके साथ कोलकाता पुलिस के तीन वरिष्ठ अधिकारी सलिल रॉय, तुषारकांति घोष और हीरक दलपति को भी जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

सरकार ने जांच दल को एक अक्टूबर तक पहली रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर एसआईटी राज्य पुलिस और कोलकाता पुलिस से अतिरिक्त अधिकारियों तथा कर्मचारियों की सहायता ले सकेगी।

तीन एफआईआर के आधार पर होगी जांच

एसआरएफटीआई विवाद की जांच पंचसायर थाने में दर्ज तीन प्राथमिकियों के आधार पर की जाएगी। गृह विभाग की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि एसआईटी इन मामलों से जुड़े तथ्यों और घटनाक्रम की पड़ताल करेगी।

जांच के दौरान रविवार को हुई झड़प की परिस्थितियों, विवाद की शुरुआत और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की संभावना है। दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी। हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष के आरोपों को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

एसआरएफटीआई

राज्य सरकार की ओर से तय की गई समयसीमा के अनुसार, एसआईटी को शुरुआती निष्कर्ष एक अक्टूबर तक प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की दिशा तय हो सकती है।

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बैठक की अनुमति को लेकर शुरू हुआ था विवाद

एसआरएफटीआई में हिंसा की घटना पिछले रविवार सुबह हुई थी। संस्थान के सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) की ओर से एक बैठक आयोजित की गई थी। संगठन का दावा है कि बैठक के लिए संस्थान के अधिकारियों से पहले ही अनुमति ली गई थी।

हालांकि, बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद छात्रों के एक समूह ने परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर आपत्ति जताई। छात्रों ने सभागार के बाहर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और रजिस्ट्रार से सवाल किया कि किसी निजी संगठन को संस्थान परिसर में बैठक आयोजित करने की अनुमति किस आधार पर दी गई।

बैठक को लेकर शुरू हुआ यह विरोध जल्द ही विवाद में बदल गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ा और मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। इस घटना के बाद संस्थान के छात्रों और शिक्षकों के बीच नाराजगी देखी गई।

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