देशभर में जब दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में रौनक रहती है और भक्त मां दुर्गा की आराधना में जुटे होते हैं, तब झारखंड के असुर जनजाति के कई परिवार इस समय को शोक के रूप में मनाते हैं।
NEWS SAGA DESK
देशभर में जब दुर्गा पूजा के दौरान पंडालों में रौनक रहती है और भक्त मां दुर्गा की आराधना में जुटे होते हैं, तब झारखंड के असुर जनजाति के कई परिवार इस समय को शोक के रूप में मनाते हैं। इस परंपरा के पीछे उनकी अपनी ऐतिहासिक मान्यताएं, सांस्कृतिक पहचान और पूर्वजों से जुड़ी आस्था है।
झारखंड के गुमला, लातेहार और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले असुर समुदाय के कई लोग महिषासुर को अपना पूर्वज और एक पराक्रमी राजा मानते हैं। मुख्यधारा की पौराणिक मान्यताओं में महिषासुर को देवी दुर्गा द्वारा पराजित किए गए असुर के रूप में वर्णित किया जाता है, जबकि इस समुदाय की अपनी लोकमान्यताएं इससे अलग हैं। इसी वजह से दुर्गा पूजा के दौरान उनकी भावनाएं और परंपराएं दूसरे समुदायों से भिन्न दिखाई देती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, असुर समुदाय के कुछ लोग नवरात्रि की षष्ठी से दशमी तक शोक मनाते हैं। इस दौरान वे दिन में घरों से बाहर निकलने से परहेज करते हैं और जरूरी काम रात में करते हैं। हालांकि, इस परंपरा का पालन सभी परिवारों में एक समान हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
दुर्गा पूजा समाप्त होने के बाद दीपावली के आसपास समुदाय के लोग अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। कुछ स्थानों पर मिट्टी का छोटा पिंड बनाकर उसकी पूजा की जाती है और पूर्वजों को याद किया जाता है। गौशाला की पूजा भी उनकी धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है।
असुर समुदाय में भैंसे यानी काड़ा से जुड़ा एक विशेष अनुष्ठान भी प्रचलित बताया जाता है, जो मान्यता के अनुसार हर 12 वर्ष में आयोजित किया जाता है। गुमला के बिशुनपुर, डुमरी, घाघरा और चैनपुर तथा लातेहार के महुआडांड़ जैसे इलाकों में इस समुदाय की पारंपरिक संस्कृति आज भी देखने को मिलती है।
समुदाय के पारंपरिक अनुष्ठानों में बैगा और पाहन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पूजा की शुरुआत उनके द्वारा की जाती है, जिसके बाद परिवार अपने घरों में धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं।
असुर जनजाति की यह परंपरा झारखंड की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। यह भी बताती है कि अलग-अलग समुदाय किसी ऐतिहासिक या धार्मिक प्रसंग को अपनी मान्यताओं और सांस्कृतिक स्मृतियों के आधार पर अलग-अलग नजरिए से देखते हैं।
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