News Saga Desk
संतोष कुमार गंगवार ने गंगा दशहरा के अवसर पर लोहरदगा जिले के चूल्हापानी में आयोजित “देवनद-दामोदर महोत्सव-2026” को संबोधित करते हुए कहा कि नदियाँ केवल जलधाराएँ नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि दामोदर नदी झारखंड की जीवनरेखा के रूप में जनजीवन, कृषि, उद्योग और सांस्कृतिक परंपराओं को समृद्ध करती रही है।
राज्यपाल ने इस आयोजन को नदियों और प्रकृति संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता का सशक्त अभियान बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण और जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में नदियों का संरक्षण मानव जीवन की अनिवार्य आवश्यकता बन गया है।
उन्होंने कहा कि जलस्रोत सुरक्षित रहेंगे, तभी जीवन और विकास का संतुलन संभव होगा। साथ ही यह भी कहा कि नदियों की स्वच्छता केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है।
राज्यपाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “नमामि गंगे” परियोजना और “Lifestyle for Environment (LiFE)” जैसे अभियानों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण को जन-संकल्प का रूप दिया गया है। उन्होंने कहा कि समाज की सक्रिय भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव संभव है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने युवाओं और सामाजिक संगठनों से पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि नदियाँ सुरक्षित रहेंगी, तभी सभ्यताएँ और मानव जीवन भी सुरक्षित रहेंगे। साथ ही दामोदर सहित सभी नदियों की स्वच्छता, संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए सामूहिक संकल्प लेने की अपील की।
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