NEWS SAGA DESK
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नौसेना कमांडर अली अजमाई के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस सेंट्रल कमांड ने 27 और 28 मई की दरमियानी रात ईरान के बंदरगाह शहर बंदर अब्बास पर हमला किया। दावा किया जा रहा है कि इस हमले में आईआरजीसी के वरिष्ठ नौसैनिक कमांडर अली अजमाई को निशाना बनाया गया। उन्हें हाल ही में आईआरजीसी नौसेना का नया कमांडर नियुक्त किया गया था।
इस संघर्ष पर नजर रखने वाले समूह “द ईरान वॉचर” ने कहा कि अपुष्ट रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि अजमाई संभवतः मारे गए हैं। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने अभी तक उनकी स्थिति पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
बताया जा रहा है कि बंदर अब्बास पर हुए हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए एक अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया। इसी बीच कुवैत पर ड्रोन और मिसाइलें दागे जाने की भी खबर सामने आई है। कुवैत सेना के अनुसार, उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना ने बताया कि देश के कुछ हिस्सों में सुने गए जोरदार धमाके इन्हीं मिसाइल और ड्रोन इंटरसेप्शन का परिणाम थे।
आईआरजीसी ने दावा किया है कि उसने बंदर अब्बास पर हमले के लिए इस्तेमाल किए गए अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया है। संगठन ने कहा कि अमेरिका के हर हमले का जवाब दिया जाएगा।
इस बीच ईरान ने ओमान के समर्थन में बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों से डरने की जरूरत नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ाई ने कहा कि ओमान ईरान का मित्र देश है और उसके खिलाफ किसी भी कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य सभी देशों के लिए खुला रहेगा और इसकी निगरानी अमेरिका करेगा। उन्होंने ओमान को चेतावनी दी थी कि यदि उसने ईरान के साथ मिलकर इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण करने की कोशिश की तो अमेरिका सख्त कार्रवाई करेगा।
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