News Saga Desk
सरकारी खर्च पर बिहार सरकार के अधिकारी और कर्मचारी अब परिवार के साथ साल में 8 दिन पर्यटन स्थलों पर मौज-मस्ती करेंगे। सरकार का कहना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन आम जनता के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।
आखिर सरकारी खर्च पर सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को ही यह सुविधा क्यों? आम जनता को क्या फायदा मिलेगा?
आपको बता दें कि नई योजना के अनुसार बिहार सरकार ने “बिहार दर्शन” पहल शुरू की है, जिसके तहत सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी हर तीन महीने में एक बार, यानी साल में चार बार, परिवार के साथ दो दिन और दो रात राज्य के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करेंगे। यह पूरा दौरा “ऑन ड्यूटी” माना जाएगा और यात्रा का खर्च TA/DA सहित सरकार उठाएगी।
इस योजना के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों को साल में 4 बार पर्यटन यात्रा करनी होगी, यानि कुल 8 दिन का सरकारी टूर, इसमें वे परिवार को साथ ले जा सकते है, यात्रा के लिए निजी छुट्टी लेने की जरूरत नहीं होगी , क्यूंकि ये यात्रा सरकारी खर्च पर होगी। सभी कर्मचारियों को कम से कम 3 पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना अनिवार्य है
सरकार का दावा है कि इससे स्थानीय पर्यटन, होम-स्टे, छोटे दुकानदारों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कर्मचारियों को मानसिक तनाव से राहत भी मिलेगी।
लेकिन इस योजना को लेकर आम लोगों का कहना है कि इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और फर्जी बिल बनाकर पैसे निकालने की संभावना भी बढ़ सकती है। एक ओर देश महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है वही दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों के लिए ऐसी योजना कई सारे सवाल खड़े कर रही है।
हालांकि, यह भी सच है कि केंद्र और कई राज्य सरकारों में कर्मचारियों को LTC जैसी सुविधाएं पहले से मिलती रही हैं, जिनमें यात्रा खर्च का कुछ हिस्सा सरकार वहन करती है। फर्क सिर्फ इतना है कि वहां कर्मचारी अपनी छुट्टी लेकर घूमने जाते हैं और बाकी खर्च खुद उठाते हैं। विपक्ष ने इसको लेकर सरकार को घेरते हुए इसे बेतुका फैसला बताया है. वहीं, बिहार सरकार का मानना है कि यह निर्णय राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है. जब हजारों की संख्या में सरकारी अधिकारी और उनके परिवार हर तीन महीने में बिहार के अलग-अलग जिलों, जैसे राजगीर, बोधगया, वाल्मीकि नगर या ग्रामीण पर्यटन क्षेत्रों में जाएंगे, तो इससे स्थानीय होटलों, गाइडों, दुकानदारों और परिवहन उद्योग को भारी आर्थिक लाभ होगा. इसके अतिरिक्त, जब खुद सरकारी तंत्र जमीनी स्तर पर कमियों को देखेगा, तो पर्यटन सुविधाओं का विकास भी तेजी से होगा.
अब देखना यह होगा कि बिहार सरकार की यह “बिहार दर्शन” योजना वास्तव में पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है या फिर यह सिर्फ सरकारी खर्च बढ़ाने वाली योजना बनकर रह जाती है।
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