सुप्रीम कोर्ट ने बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा। इससे देवघर में मेडिकल कॉलेज खोलने का रास्ता साफ हुआ।
News Saga Desk
रांची/नई दिल्ली। देवघर में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज खोलने की दिशा में चल रहे कानूनी विवाद को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की जमीन के म्यूटेशन और मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी अनुमति से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी है। 15 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जमीन के म्यूटेशन से संबंधित एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट जारी करने के मामले में अदालत ने अलग समयसीमा तय की है।
इस मामले को लेकर गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे न्याय की जीत बताया। उन्होंने राज्य सरकार पर मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया। हालांकि, अदालत के आदेश में म्यूटेशन और एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट के लिए अलग-अलग निर्देश दिए गए हैं।
जमीन के म्यूटेशन पर हाईकोर्ट ने बरकरार रखा आदेश
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट और राज्य सरकार के बीच जमीन के म्यूटेशन को लेकर विवाद चल रहा था। ट्रस्ट ने परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की नीलामी में जमीन और उससे जुड़ी संपत्तियां खरीदी थीं। इसके बाद ट्रस्ट ने अपने नाम पर जमीन का म्यूटेशन कराने के लिए आवेदन दिया था।
देवघर के राजस्व अधिकारियों ने म्यूटेशन का आवेदन खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ ट्रस्ट ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तीन नवंबर 2025 को एकल पीठ ने ट्रस्ट के पक्ष में फैसला सुनाते हुए म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करने और राजस्व रिकॉर्ड में जरूरी प्रविष्टि करने का निर्देश दिया था।
राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज ने इस आदेश को चुनौती दी थी। 15 जुलाई 2026 को मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने दोनों अपीलें खारिज कर दीं।
मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी अनुमति पर भी सुनवाई
बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की ओर से देवघर में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना है। इसके लिए राज्य सरकार से एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट मांगा गया था। यह प्रमाणपत्र मेडिकल कॉलेज की स्थापना और संचालन की स्वीकृति प्रक्रिया में जरूरी होता है।
ट्रस्ट का आवेदन लंबे समय तक लंबित रहने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। एकल पीठ ने नवंबर 2025 में जमीन का सत्यापन कर चार सप्ताह के भीतर प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश को भी चुनौती दी थी।

खंडपीठ ने जुलाई 2026 में इस मामले में एकल पीठ के आदेश में संशोधन किया। अदालत ने देवघर के उपायुक्त को चार सप्ताह के भीतर जमीन का सत्यापन पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी को छह सप्ताह के भीतर एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट के आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेना होगा। इस तरह अदालत ने प्रमाणपत्र जारी करने का सीधा आदेश देने के बजाय नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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निशिकांत दुबे ने बताया न्याय की जीत
गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने इस कानूनी घटनाक्रम पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे न्याय की जीत बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया में राज्य सरकार की ओर से बाधाएं डाली जा रही थीं।
उनके अनुसार, अदालत के फैसले से बाबा बैद्यनाथ मेडिकल कॉलेज की स्थापना का रास्ता साफ होने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, सांसद की ओर से राज्य सरकार पर लगाए गए आरोप उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया हैं। अदालत के आदेश में जमीन के म्यूटेशन और जरूरी प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को लेकर विशिष्ट निर्देश दिए गए हैं।
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