झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा बजट में बढ़ोतरी की मांग की।
News Saga Desk
रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के तत्वावधान में मंगलवार को कांग्रेस भवन, रांची में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को प्रदेश मीडिया चेयरमैन सतीश पौल मुंजनी, प्रदेश मीडिया संयोजक लाल किशोर नाथ शाहदेव, मीडिया संयोजक डॉ. तौसीफ तथा प्रवक्ता सोनाल शांति ने संबोधित किया।
इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था के गिरते स्तर को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन सरकार इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने में विफल रही है।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देशभर में लगभग 89 पेपर लीक के मामले सामने आए, जिनके कारण 48 बार परीक्षाएं दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि एक अन्य अध्ययन के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 15 राज्यों में 41 पेपर लीक की घटनाएं हुईं, जिससे करीब 1.4 करोड़ अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया, जिसमें दोषियों के लिए 3 से 10 वर्ष तक की सजा और 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद राजस्थान सहित कई राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं जारी हैं। इससे स्पष्ट है कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं हुआ और सरकार इसे रोकने में सफल नहीं रही।
प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने हाल के वर्षों में हुई प्रमुख परीक्षा अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नीट यूजी 2026 परीक्षा में लगभग 24 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ और मामला सीबीआई जांच तथा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। इसी तरह यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2024 का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे करीब 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
वक्ताओं ने कहा कि सीटेट 2021 परीक्षा में पेपर लीक के कारण 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों को नुकसान उठाना पड़ा, जबकि यूजीसी नेट 2024 परीक्षा आयोजित होने के अगले ही दिन रद्द करनी पड़ी। इस परीक्षा से करीब 11 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए और उन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ी।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के अपने आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 1 मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में 9 लाख 64 हजार 359 पद रिक्त थे। वहीं 1 जुलाई 2024 तक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 84 हजार 106 पद खाली पड़े थे।
रेलवे भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच भारतीय रेलवे में 4.11 लाख नियुक्तियां हुई थीं, जबकि 2014 से 2024 के बीच यह संख्या बढ़कर केवल 5.02 लाख तक पहुंची। कांग्रेस का आरोप है कि इस दौरान नौकरी चाहने वाले युवाओं की संख्या कई गुना बढ़ गई, लेकिन रोजगार सृजन की रफ्तार बेहद धीमी रही।
युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर भी कांग्रेस ने चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में बेरोजगारी दर सामान्य स्थिति में 10.2 प्रतिशत और साप्ताहिक आधार पर 13.8 प्रतिशत है। वहीं माध्यमिक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त युवाओं में बेरोजगारी दर 6.5 प्रतिशत दर्ज की गई है। उन्होंने दावा किया कि स्वतंत्र अध्ययनों के अनुसार देश में सबसे अधिक बेरोजगार वर्ग उच्च शिक्षित स्नातक और स्नातकोत्तर युवा हैं।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शिक्षा और रोजगार किसी भी देश के विकास की बुनियाद होते हैं। यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे तो देश का भविष्य प्रभावित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने में असफल रही है।
प्रेस वार्ता के अंत में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और युवाओं को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के लिए शिक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने की मांग भी की।
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