झारखंड आंदोलन के जननायक और झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान से नवाजा गया। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया, जिसे उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने ग्रहण किया।
News Saga Desk
नई दिल्ली/रांची। झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और जननायक दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान प्रदान किया। दिवंगत शिबू सोरेन की ओर से उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने पद्मभूषण सम्मान ग्रहण किया।
यह सम्मान शिबू सोरेन के उस ऐतिहासिक योगदान को मान्यता देता है, जो उन्होंने झारखंड की पहचान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और आदिवासी-मूलवासी समुदायों के अधिकारों के लिए अपने जीवनभर किए गए संघर्षों के माध्यम से स्थापित किया। उनके नेतृत्व में चले लंबे जनआंदोलन ने अलग झारखंड राज्य के गठन की नींव मजबूत की और अंततः वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
शिबू सोरेन को झारखंड में श्रद्धा और सम्मान के साथ ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक और सामाजिक जीवन को समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया था। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में उनकी लोकप्रियता और जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें झारखंड की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा बना दिया।
समारोह के दौरान रूपी सोरेन ने सम्मान ग्रहण करते हुए भावुक क्षणों में दिशोम गुरु के संघर्षों और उनके सपनों को याद किया। इस अवसर पर मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ शिबू सोरेन के योगदान को नमन किया।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इसी वर्ष 25 जनवरी को पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी। पद्म पुरस्कार देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में शामिल हैं, जो कला, साहित्य, शिक्षा, सामाजिक कार्य, विज्ञान, चिकित्सा, खेल और लोककल्याण सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किए जाते हैं।
शिबू सोरेन को यह सम्मान लोककल्याण, सामाजिक उत्थान और आदिवासी-मूलवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए उनके असाधारण योगदान के लिए प्रदान किया गया है। उनके नेतृत्व और संघर्ष ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश में सामाजिक न्याय और जनअधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी।
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झारखंड में पद्मभूषण सम्मान की घोषणा और सम्मान ग्रहण किए जाने के बाद राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जगत के लोगों ने इसे पूरे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया। विभिन्न संगठनों और नेताओं ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संघर्ष, विचार और जनसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प, जनसेवा और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण से समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। पद्मभूषण सम्मान उनके जीवनभर के संघर्ष और योगदान को राष्ट्र द्वारा दी गई एक महत्वपूर्ण श्रद्धांजलि माना जा रहा है।
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