केंद्र सरकार की मंशा पर कांग्रेस ने उठाया सवाल, कहा इसी लिए नहीं दिया महिला आरक्षण बिल को समर्थन

News Saga Desk

राजधानी रांची स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, कांग्रेस विधायक दल प्रदीप यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह सहित पदाधिकारी एवं प्रवक्ताओं के द्वारा संयुक्त रूप से संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया गया इस संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पहलुओं के विषय को विस्तृत रूप से बताया गया।

संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि केन्द्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करना चाहती थी। सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष इस बिल को पारित कर दे ताकि इसकी आड़ में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर सके। कांग्रेस ने कहा सरकार द्वारा जो साजिश रची गयी, उसका उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि सत्ता हासिल करना था।उन्होंने कहा कि पहले जनगणना फिर डिमिलिटेशन तब उसके बाद महिला आरक्षण की बात को विपक्षी दलों ने मान लिया था, परन्तु इसमें सरकार को संशोधन की जरूरत महसूस हुई, तो विपक्षी दलों, जिनका समर्थन प्राप्त था बिल पास करने में उनसे बातचीत, विमर्श क्यों नहीं लिया गया। इतनी हड़बड़ी क्यों थी बंगाल-तमिलनाडु के चुनाव के दौरान ससंद में संशोधन लाने की।

ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पाण्डेंय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि महिला विधेयक की चाशनी में केंद्र सरकार अपनी घटिया राजनीति को थोपने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है। महिला विधेयक की आड़ में परिसीमन का खेल खेलनी वाली बीजेपी सरकार का भांडा फूट चुका है, जो अंक गणित केंद्र की सरकार ने अगले चुनाव के लिए परिसीमन के बहाने सेट किया था, उसको प्छक्प्। गठबंधन ने डिकोड कर दिया है। यही वजह है कि पिछले 12 साल से केंद्र में शासन कर रही बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार पहली बार लोकसभा में विधेयक गिर जाने से तिलमिलाई हुई है। वो बेचौन है क्योंकि पहली बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी है। देश की आबो हवा बदल रही है। राजनैतिक मौसम अब करवट लेने लगा है। देश के प्रधानमंत्री महिला आरक्षण और सम्मान के नाम पर अपने भविष्य को लेकर सत्ता में काबिज रहने काएक षडयंत्र रचा था, जो पूरी रह धराशाही हो चुका है। भाजपा की मंशा कहीं से भी महिलाओं को आरक्षण देने की नहीं है। अगर ऐसा होता तो साल 2023 में लोकसभा से सर्वसम्मति से पारित महिला आरक्षण विधेयक के आधार पर साल 2024 का चुनाव होना चाहिए था, तब महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल पाता, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। दरअसल बीजेपी ने हमेशा से महिलाओं को ठगने, मुद्दों से भटकाने और उनकी हकमारी करने का काम किया है।

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