News Saga Desk
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में महिला आरक्षण बिल पारित न हो पाने पर देश की करोड़ों महिलाओं से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगी। उन्होंने कहा कि बेटियों के अधिकारों की लड़ाई में उनकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध थी, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके जैसी पार्टियों ने महिला अधिकारों के रास्ते में बाधा खड़ी की। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में बिल गिरने के बाद विपक्ष का मेज थपथपाना देश की नारी शक्ति के आत्मसम्मान पर चोट है।
संबोधन की 10 बड़ी बातें
- महिलाओं से माफी
पीएम ने कहा कि वह देश की माताओं, बहनों और बेटियों से दिल से माफी मांगते हैं कि महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन पारित नहीं हो सका। - विपक्ष पर आरोप
उन्होंने कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा पर स्वार्थ की राजनीति करने का आरोप लगाया, जिससे महिलाओं को नुकसान हुआ। - संसद में व्यवहार पर सवाल
पीएम ने कहा कि बिल गिरने पर विपक्ष का जश्न मनाना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। - 40 साल का इंतजार
उन्होंने बताया कि यह बिल 40 वर्षों से लंबित महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम था। - ‘भ्रूण हत्या’ जैसा कृत्य
पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष ने इस प्रस्ताव की ‘भ्रूण हत्या’ कर दी, जो नारी शक्ति के साथ अन्याय है। - विपक्ष की मानसिकता पर सवाल
उन्होंने कहा कि कुछ दल महिलाओं के सशक्तिकरण से डरते हैं और परिवारवाद की राजनीति करते हैं। - ‘बांटो और राज करो’ की नीति
पीएम ने कांग्रेस पर विभाजनकारी राजनीति करने और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। - सुधारों का विरोध
उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा से बड़े सुधारों का विरोध करती रही है, चाहे वह डिजिटल पेमेंट हो या सामाजिक बदलाव। - नकारात्मक राजनीति पर निशाना
पीएम ने विपक्ष पर “लटकाना, अटकाना और भटकाना” की राजनीति करने का आरोप लगाया। - चुनावी संकेत
उन्होंने कहा कि नारी शक्ति का अपमान आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा और महिलाएं इसका जवाब देंगी।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन न केवल महिला आरक्षण बिल को लेकर उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि आने वाले राजनीतिक माहौल के संकेत भी देता है, जहां नारी शक्ति केंद्र में रहने वाली है।
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