NEWS SAGA DESK
नई दिल्ली : बैंकों ने आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 के तहत छोटे उद्यमों और अन्य पात्र संस्थाओं के लिए 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के ऋण को मंजूरी दी है। इसमें वैश्विक संकट से प्रभावित एयरलाइन कंपनियों के लिए लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान भी शामिल है। योजना का लक्ष्य 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराना है।
पश्चिम एशिया संकट को लेकर आयोजित अंतर-मंत्रालयी प्रेसवार्ता में वित्तीय सेवा विभाग के संयुक्त सचिव मनोज मुत्तथिल अयप्पन ने सोमवार को बताया कि आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 को 5 मई को शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य व्यवसायों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तथा गैर-एमएसएमई क्षेत्र को पर्याप्त नकदी उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस योजना को मंजूरी दी थी। 29 मई तक योजना के तहत 1.71 लाख करोड़ रुपये के लिए 2.62 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से बैंकों ने लगभग 80 हजार आवेदनों को मंजूरी प्रदान की है।
संयुक्त सचिव के अनुसार अब तक 35,194 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 15,720 करोड़ रुपये की गारंटी भी जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र संस्थाओं तक पहुंचाने के लिए देशभर में विशेष जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि 18,100 करोड़ रुपये के कुल व्यय वाली ईसीएलजीएस 5.0 योजना पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित एयरलाइन कंपनियों और एमएसएमई क्षेत्र को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके तहत बैंक पात्र संस्थाओं को उनकी मौजूदा कार्यशील पूंजी के आधार पर 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण उपलब्ध करा सकते हैं।
योजना के तहत एयरलाइन क्षेत्र को दिए जाने वाले ऋण की अवधि पहली ऋण वितरण तिथि से सात वर्ष होगी, जिसमें दो वर्ष की स्थगन अवधि (मोराटोरियम) शामिल रहेगी। वहीं एमएसएमई और गैर-एमएसएमई इकाइयों के लिए ऋण अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है, जिसमें एक वर्ष का मोराटोरियम मिलेगा।
इस योजना के अंतर्गत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड सदस्य ऋण संस्थानों को एमएसएमई के लिए 100 प्रतिशत और गैर-एमएसएमई संस्थाओं के लिए 90 प्रतिशत तक ऋण गारंटी कवरेज प्रदान करेगी।
उल्लेखनीय है कि ईसीएलजीएस योजना पहली बार मई 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक गतिविधियों को सहारा देने और कारोबारों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। अब इसके नए संस्करण के माध्यम से संकटग्रस्त क्षेत्रों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है।
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