Palamu News: भीषण गर्मी से घटा भीम बराज का जलस्तर, जल संकट की बढ़ी चिंता

News Saga Desk

झारखंड | पलामू में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब जलस्रोतों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले चार दिनों की तेज गर्मी के कारण मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज का जलस्तर तेजी से घटा है। अधिकारियों के अनुसार बराज में पानी का स्तर करीब 1.2 मीटर तक कम हो गया है, जिससे क्षेत्र में जल संकट की आशंका बढ़ने लगी है।

भीम बराज का जल भंडारण पलामू और गढ़वा जिले के कई गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बराज में पर्याप्त पानी रहने से आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर संतुलित बना रहता है और किसानों को सिंचाई के लिए भी राहत मिलती है।

अपस्ट्रीम में दर्ज हुआ 1.2 मीटर जल भंडारण

गुरुवार को बराज के अपस्ट्रीम क्षेत्र में 1.2 मीटर जल भंडारण दर्ज किया गया। लगातार गिरते जलस्तर को देखते हुए विभागीय अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। जल भंडारण को बचाने और पानी के अनावश्यक बहाव को रोकने के लिए बराज में लगे सभी 40 गेट बंद कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पानी के स्टॉक को बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी था।

बिहार और झारखंड के अभियंताओं की संयुक्त पहल

भीम बराज के संचालन और निगरानी में बिहार और झारखंड के जल संसाधन विभाग की अहम भूमिका रहती है। अभियंताओं के संयुक्त प्रयास से फिलहाल जलस्तर को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। मेदिनीनगर जल संसाधन विभाग के रूपांकन प्रमंडल टू की ओर से बराज की देखरेख की जाती है।

विभागीय कर्मियों का कहना है कि मौजूदा भीषण गर्मी में जल संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है और हर स्तर पर पानी बचाने की कोशिश की जा रही है।

बांयी नहर में रिसाव से बढ़ी परेशानी

जानकारी के अनुसार भीम बराज की बांयी नहर के मुख्य फाटक में छेद हो गया है, जिससे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। इस वजह से जरूरत से ज्यादा पानी बांयी नहर में पहुंच रहा है और बराज के अपस्ट्रीम का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा सकता है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक छह मई को बराज का जलस्तर लगभग 1.5 मीटर था, लेकिन लगातार गर्मी और रिसाव के कारण इसमें गिरावट जारी है।

निगरानी में लापरवाही का आरोप

भीम बराज नियंत्रण कक्ष के कर्मियों ने बताया कि रबी फसल के मौसम में बराज की निगरानी के लिए झारखंड जल संसाधन विभाग के अभियंता नियमित रूप से ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते हैं। कई अधिकारी मेदिनीनगर में रहकर मोबाइल के जरिए ही स्थिति की जानकारी लेते हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि नियमित निगरानी नहीं होने से छोटी तकनीकी समस्याएं भी बड़ी चुनौती बन जाती हैं, जिससे बराज के संचालन और जलस्तर नियंत्रण में दिक्कतें आती हैं।

15 जून के बाद बिहार विभाग संभालेगा जिम्मेदारी

स्थानीय सूत्रों के अनुसार हर वर्ष 15 जून के बाद भीम बराज के संचालन और नियंत्रण की जिम्मेदारी बिहार जल संसाधन विभाग के उत्तर कोयल परियोजना को सौंप दी जाती है। ऐसे में दोनों राज्यों के विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी माना जा रहा है।

क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की नजर अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी है, क्योंकि मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ सकती है। यदि समय रहते जल संरक्षण और मरम्मत के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सिंचाई और पेयजल संकट गंभीर रूप ले सकता है।

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