Para Teacher Pension: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पेंशन में जुड़ेगी पारा शिक्षक सेवा

NEWS SAGA DESK

Para Teacher Pension पर झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला। पारा शिक्षक की पूर्व सेवा अवधि अब पेंशन गणना में जोड़ी जाएगी। सरकार को 8 सप्ताह में लाभ देने का निर्देश।

Para Teacher Pension को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने हजारों पारा शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन पारा शिक्षकों की बाद में नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई, उनकी नियमित सेवा से पहले पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को भी पेंशन निर्धारण में शामिल किया जाएगा। न्यायालय ने राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी कर पात्र सेवानिवृत्त शिक्षकों को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही भुगतान में देरी होने पर सेवानिवृत्ति की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है।

Para Teacher Pension

पांच शिक्षकों की याचिका पर आया फैसला

Para Teacher Pension से जुड़ा यह निर्णय पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में सेवाएं दीं, लेकिन नियमित नियुक्ति मिलने के बाद उनकी पूर्व सेवा को पेंशन के लिए मान्यता नहीं दी गई। इससे उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि यदि नियुक्ति के समय पारा शिक्षक की सेवा को योग्यता और अनुभव के रूप में स्वीकार किया गया था, तो पेंशन निर्धारण के समय उसी सेवा को नजरअंदाज करना न्यायसंगत नहीं होगा।

हाईकोर्ट ने पेंशन को बताया वैधानिक अधिकार

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पेंशन किसी कर्मचारी पर सरकार की कृपा नहीं, बल्कि उसका वैधानिक अधिकार है। न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार नियमित शिक्षक नियुक्तियों में लंबे समय से पारा शिक्षकों के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित रखती रही है।

ऐसी स्थिति में उनकी पूर्व सेवा को पूरी तरह अलग मानना उचित नहीं है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि आदेश का पालन करते हुए समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएं।

हजारों शिक्षकों को मिल सकती है राहत

Para Teacher Pension पर आए इस फैसले का प्रभाव केवल याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं माना जा रहा है। झारखंड में बड़ी संख्या में ऐसे पारा शिक्षक हैं, जो नियमित शिक्षक बनने के बाद अब सेवानिवृत्ति के करीब हैं या सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

यदि सरकार इस आदेश को व्यापक स्तर पर लागू करती है, तो हजारों शिक्षकों को पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में राहत मिलने की संभावना है।

पारा शिक्षक संघ ने किया स्वागत

झारखंड राज्य पारा शिक्षक संघ ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष बजरंग प्रसाद ने कहा कि यह केवल पांच शिक्षकों की जीत नहीं, बल्कि वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे सभी पारा शिक्षकों के सम्मान और न्याय की जीत है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार अदालत के आदेश का सम्मान करते हुए सभी पात्र शिक्षकों को बिना देरी इसका लाभ उपलब्ध कराएगी।

संघ के महासचिव ज्योति कुमार ने भी कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्षों की सेवा को अनदेखा नहीं किया जा सकता। अब सरकार को जल्द आदेश लागू कर शिक्षकों को उनका वैधानिक अधिकार देना चाहिए।

Background

झारखंड में पारा शिक्षक लंबे समय से विभिन्न सरकारी विद्यालयों में कार्यरत रहे हैं। बाद में कई पारा शिक्षकों की नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई। हालांकि, पेंशन निर्धारण के दौरान उनकी पूर्व सेवा अवधि को शामिल नहीं किए जाने को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था।

Impact

हाईकोर्ट के इस फैसले से हजारों पारा शिक्षकों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। साथ ही लंबे समय से लंबित पेंशन संबंधी विवाद के समाधान का रास्ता भी साफ होता दिख रहा है।

Official Statement

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि आठ सप्ताह के भीतर पेंशन निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कर पात्र सेवानिवृत्त शिक्षकों को सभी सेवानिवृत्ति लाभ उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही देरी होने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए।

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Public Information

जिन पारा शिक्षकों की नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्ति हो चुकी है और जो सेवानिवृत्त हैं या सेवानिवृत्ति के निकट हैं, वे आदेश के क्रियान्वयन से संबंधित जानकारी के लिए शिक्षा विभाग और संबंधित जिला शिक्षा कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

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