West Bengal Politics में नया मोड़। बागी TMC नेताओं ने चुनाव आयोग से मिलकर दो-तिहाई विधायकों के समर्थन का दावा किया। जानें पूरा घटनाक्रम।
नई दिल्ली/कोलकाता। West Bengal Politics में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर दावा किया कि पार्टी के दो-तिहाई से अधिक विधायक उनके साथ हैं। रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को “असली तृणमूल कांग्रेस” बताते हुए पार्टी पर परिवारवाद, तानाशाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इस घटनाक्रम ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है।

चुनाव आयोग से मुलाकात, बहुमत का दावा
चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद रितब्रत बनर्जी ने कहा कि 22 जून को कोलकाता में उनके गुट की बैठक हुई थी, जिसमें नई राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया। इसके बाद 23 जून को आयोग को इसकी जानकारी दी गई और मिलने का समय मांगा गया।
उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के दो-तिहाई से अधिक विधायक, बड़ी संख्या में पार्षद और जिला परिषद सदस्य उनके साथ हैं। उनके अनुसार यह लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर कथित तानाशाही और परिवारवाद के खिलाफ है।
परिवारवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का दावा
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि पार्टी का मूल चरित्र बदल दिया गया है और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी पर एक परिवार का प्रभाव बढ़ गया है और संगठन में लोकतांत्रिक परंपराएं कमजोर हुई हैं।
उन्होंने कहा कि उनका गुट भ्रष्टाचार और कथित सिंडिकेट संस्कृति के खिलाफ संघर्ष कर रहा है तथा पार्टी को उसके मूल स्वरूप में वापस लाने की कोशिश कर रहा है।
“असली TMC हम हैं”
बागी गुट के नेता ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में किसी तरह की टूट नहीं हुई है, बल्कि उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को पहले ही इस संबंध में पत्र भेजा जा चुका है और अब उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
रितब्रत बनर्जी ने कहा कि उनके लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी क्या कहते हैं, बल्कि संगठन के निर्वाचित प्रतिनिधियों का समर्थन उनके साथ है।
64 विधायकों के समर्थन का दावा
बागी गुट का दावा है कि 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 80 विधायकों में से 64 विधायक उनके साथ हैं। वहीं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट के साथ लगभग 20 विधायक होने का दावा किया गया है।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि चुनाव आयोग या विधानसभा की ओर से नहीं की गई है।
हस्ताक्षर विवाद और CID की जांच
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए एक प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित गड़बड़ी का मामला भी सामने आया है। इस मामले की जांच राज्य की सीआईडी कर रही है।
रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के हस्ताक्षरों को लेकर विवाद उठने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने दोनों नेताओं को निलंबित कर दिया था। इसके बाद बागी गुट के विधायकों ने नया प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा, जिसमें स्वयं को बहुमत वाला गुट बताया गया।
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आगे क्या हो सकता है?
अब सभी की नजर चुनाव आयोग और विधानसभा स्तर पर होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है। यदि बहुमत के दावे और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर विवाद गहराता है, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के भविष्य पर पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है।
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