डिलीवरी का बदलता ट्रेंड! भारत में क्यों बढ़ रहे सी-सेक्शन के मामले

भारत में बच्चों के जन्म का तरीका पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदल रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल जन्मों में सी-सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी की हिस्सेदारी 21.5 प्रतिशत थी। हालांकि, सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच इसमें बड़ा अंतर देखने को मिलता है

NEWS SAGA DESK:

भारत में बच्चों के जन्म का तरीका पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदल रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल जन्मों में सी-सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी की हिस्सेदारी 21.5 प्रतिशत थी। हालांकि, सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के बीच इसमें बड़ा अंतर देखने को मिलता है। निजी स्वास्थ्य संस्थानों में 47.4 प्रतिशत जन्म सी-सेक्शन से हुए, जबकि सरकारी संस्थानों में यह आंकड़ा 14.3 प्रतिशत रहा।

भारत में बच्चों के जन्म का तरीका पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदल रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में कुल जन्मों में सी-सेक्शन यानी सिजेरियन डिलीवरी की हिस्सेदारी 21.5 प्रतिशत थी।

सी-सेक्शन एक सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल कई बार मां या बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरी हो जाता है। वहीं, बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के सर्जरी कराने पर इसके अपने जोखिम हो सकते हैं। WHO के अनुसार, सी-सेक्शन का फैसला किसी तय लक्ष्य या ट्रेंड के आधार पर नहीं, बल्कि महिला और बच्चे की वास्तविक मेडिकल स्थिति को देखते हुए किया जाना चाहिए।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं C-Section के मामले?

सी-सेक्शन की बढ़ती संख्या के पीछे एक ही कारण नहीं है। कई बार गर्भावस्था या प्रसव के दौरान ऐसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं, जहां सामान्य प्रसव की तुलना में ऑपरेशन मां और बच्चे के लिए ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है।

मां की उम्र और गर्भावस्था की जटिलताएं

बढ़ती उम्र में गर्भधारण करने पर कुछ महिलाओं में गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में डॉक्टर लगातार मां और बच्चे की स्थिति की निगरानी करते हैं और जरूरत पड़ने पर डिलीवरी का तरीका बदलने का निर्णय लिया जा सकता है।

पिछली डिलीवरी C-Section से होना

अगर महिला की पहले सिजेरियन डिलीवरी हो चुकी है, तो अगली गर्भावस्था में डिलीवरी का तरीका तय करते समय पिछली सर्जरी समेत कई मेडिकल परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाता है। हर महिला के लिए दोबारा सी-सेक्शन जरूरी हो, ऐसा नहीं है; इसका फैसला व्यक्तिगत मेडिकल स्थिति के आधार पर किया जाता है।

बच्चे की स्थिति या प्रसव के दौरान परेशानी

कई बार गर्भ में बच्चे की स्थिति ऐसी होती है कि सामान्य प्रसव जोखिम भरा हो सकता है। इसके अलावा प्रसव के दौरान बच्चे की स्थिति को लेकर चिंता, प्रसव का लंबे समय तक आगे न बढ़ना या अन्य आपात परिस्थितियां भी सी-सेक्शन की जरूरत पैदा कर सकती हैं। WHO भी prolonged labour, fetal distress और abnormal fetal position जैसी स्थितियों को सी-सेक्शन की संभावित चिकित्सकीय वजहों में शामिल करता है।

मां की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की स्थिति में डॉक्टरों को डिलीवरी की रणनीति पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। हालांकि, किसी बीमारी का होना अपने आप में सी-सेक्शन का निश्चित कारण नहीं है। फैसला महिला की पूरी मेडिकल रिपोर्ट और उस समय की स्थिति के आधार पर किया जाता है।

क्या महिलाएं अपनी पसंद से डिलीवरी की तारीख चुन रही हैं?

कुछ मामलों में महिलाएं प्रसव पीड़ा, अस्पताल में लंबे समय तक रहने या अपनी व्यक्तिगत सुविधा से जुड़ी चिंताओं के कारण सिजेरियन डिलीवरी को लेकर रुचि दिखा सकती हैं। शुभ तारीख या पारिवारिक सुविधा जैसे कारणों से भी डिलीवरी की तारीख को लेकर पसंद सामने आ सकती है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक केवल सुविधा, डर या तारीख तय करने की इच्छा के आधार पर सर्जरी का फैसला नहीं किया जाना चाहिए। सी-सेक्शन एक बड़ी सर्जरी है और इसमें संक्रमण, रक्तस्राव, एनेस्थीसिया से जुड़ी जटिलताओं तथा भविष्य की गर्भावस्थाओं में कुछ जोखिम हो सकते हैं।

नॉर्मल डिलीवरी या C-Section, कौन बेहतर?

इसका कोई एक जवाब सभी महिलाओं के लिए लागू नहीं होता। अगर मां और बच्चा स्वस्थ हैं और सामान्य प्रसव में कोई चिकित्सकीय बाधा नहीं है, तो vaginal delivery एक विकल्प हो सकती है। दूसरी ओर, जब सामान्य प्रसव मां या बच्चे के लिए जोखिम पैदा करता है, तब सी-सेक्शन जीवनरक्षक साबित हो सकता है। इसलिए डिलीवरी का तरीका केवल ट्रेंड, डर या सुविधा के आधार पर तय करने के बजाय डॉक्टर की सलाह और मां-बच्चे की मेडिकल स्थिति के अनुसार तय किया जाना चाहिए। WHO के मुताबिक सी-सेक्शन तब महत्वपूर्ण और प्रभावी है जब इसकी वास्तविक चिकित्सकीय जरूरत हो।

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