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शिबू सोरेन की सीट पर किसका हक ? अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजने की मांग

News Saga Desk

18 जून को डाले जाएंगे वोट झारखंड में बढ़ी राजनीतिक हलचल, पार्लियामेंट्री बोर्ड लगाएगा प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर

झारखंड की सीट के लिए बीजेपी से पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा और जेएमएम से बसंत सोरेन की पत्नी हेमलता सोरेन, हेमंत की बहन अंजनी और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के नामों पर कयासबाजी तेज हो गई है। जानिए अंदरखाने चल रही पूरी सियासी हलचल।

राज्यसभा चुनाव को लेकर देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा की 26 सीटों पर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है।18 जून को मतदान होगा।

झारखंड में इस चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां काफी बढ़ गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने एक सीट पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। प्रदेश भाजपा चार नामों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को भेजेगी, जिसके बाद पार्लियामेंट्री बोर्ड अंतिम फैसला लेगा।

सूत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और धनबाद के भाजपा नेता नंदलाल अग्रवाल के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। इसके अलावा भी कई बड़े नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं। भाजपा ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है जो सामाजिक समीकरण साधने के साथ-साथ अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाने में भी सक्षम हो।

वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा यानी JMM की ओर से भी कई चौंकाने वाले नाम चर्चा में हैं। सबसे पहले हेमलता सोरेन का नाम सामने आ रहा है, जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन की पत्नी हैं। हालांकि वे अब तक सक्रिय राजनीति से औपचारिक रूप से नहीं जुड़ी हैं।

दूसरा नाम अंजनी सोरेन का है, जो हेमंत सोरेन की बहन हैं। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से बसों के काफिले में झामुमो के नेता, पदाधिकारी और आम कार्यकर्ता रांची पहुंचे. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अंजनी सोरेन को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने की लिखित मांग पत्र सौंपा. कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास के बाहर ‘अंजनी सोरेन जिंदाबाद’ के नारे भी लगाए. ओडिसा से ए कार्यकर्ताओं का कहना है कि शिबू सोरेन के जाने के बाद उनकी बेटी को उनकी सीट मिलनी चाहिए। वहीं सबसे चर्चित नाम गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कल्पना सोरेन अब राज्यसभा की राजनीति की ओर रुख कर सकती हैं।

इधर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन 5 और 6 जून को रांची दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे राज्यसभा चुनाव को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ रणनीति तैयार करेंगे। साथ ही संगठनात्मक गतिविधियों और आने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी चर्चा होगी।

राज्यसभा चुनाव को लेकर एनडीए सहयोगी दलों के साथ भी भाजपा लगातार संपर्क में है। लोजपा, आजसू और जदयू के समर्थन के साथ भाजपा के पास फिलहाल 24 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। बाकी समर्थन जुटाने के लिए भी लगातार राजनीतिक बातचीत जारी है।वहीं सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर चुनाव प्रक्रिया के दौरान आर्थिक प्रलोभन, अनैतिक बाहरी दबाव और भय की आशंका जताई है. यह पत्र पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य की ओर से जारी किया गया है.

पत्र में कहा गया है कि न्यूनतम 28 विधानसभा सदस्यों के पहली वरीयता के मत से प्रस्तावित उम्मीदवारों की जीत तय होनी है. झारखंड विधानसभा में गठबंधन दलों के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है. झामुमो के 34, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक मिलाकर कुल 56 विधायक गठबंधन के साथ हैं. ऐसे में राज्यसभा की दोनों सीटों पर गठबंधन की जीत सुनिश्चित बताई गई है. अब देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और JMM आखिर किस चेहरे पर दांव लगाते हैं और राज्यसभा की इस सियासी लड़ाई में किसे जीत मिलती है।

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