ब्लैडर इन्वेज़न के साथ हाई-रिस्क सर्जरी को डॉक्टरों ने दी नई सफलता
News Saga Desk
रांची | पारस एचईसी हॉस्पिटल ने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए प्लेसेंटा परक्रेटा विद ब्लैडर इन्वेज़न के दो अत्यंत जटिल और हाई-रिस्क ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए हैं। इन सर्जरी का नेतृत्व वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ रितिका पाठक ने किया।
दोनों मरीजों का पहले सीज़ेरियन ऑपरेशन हो चुका था और गर्भावस्था के दौरान उनमें प्लेसेंटा परक्रेटा की पहचान हुई थी। यह प्रसूति विज्ञान की सबसे गंभीर स्थितियों में से एक मानी जाती है, जिसमें प्लेसेंटा गर्भाशय की दीवार को भेदते हुए आसपास के अंगों, विशेषकर यूरिनरी ब्लैडर तक फैल जाता है। ऐसी स्थिति में अत्यधिक रक्तस्राव, आसपास के अंगों को नुकसान, भारी मात्रा में रक्त चढ़ाने की आवश्यकता और मातृ मृत्यु का खतरा बना रहता है।
डॉ रितिका पाठक ने बताया कि सर्जरी की अत्यधिक जटिलता और भारी रक्तस्राव के जोखिम के कारण दोनों मरीजों को कई अस्पतालों में इलाज से मना कर दिया गया था। इसके बाद मरीजों को पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में भर्ती कराया गया, जहां विस्तृत प्री-ऑपरेटिव प्लानिंग और मल्टीडिसिप्लिनरी टीम के समन्वय से ऑपरेशन की तैयारी की गई।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, ब्लड बैंक, यूरोलॉजी और नवजात शिशु देखभाल टीमों को शामिल किया गया। ऑपरेशन के दौरान पहले सुरक्षित सीज़ेरियन डिलीवरी कराई गई, जिसके बाद मरीजों की जान बचाने के लिए सीज़ेरियन हिस्टेरेक्टॉमी की गई। भारी रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए दोनों इंटरनल इलियक आर्टरी की लिगेशन की गई। वहीं ब्लैडर में प्लेसेंटा के फैलाव के कारण आंशिक सिस्टेक्टॉमी भी करनी पड़ी।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक सुविधाओं की मदद से दोनों ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरे किए गए। सर्जरी के बाद दोनों माताओं की स्थिति स्थिर रही और उन्हें पांच दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। नियमित फॉलोअप में दोनों माताएं पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही हैं।
डॉ रितिका पाठक ने कहा कि प्लेसेंटा परक्रेटा विद ब्लैडर इन्वेज़न प्रसूति विज्ञान की सबसे चुनौतीपूर्ण और जानलेवा आपात स्थितियों में से एक है। ऐसे मामलों में केवल सर्जिकल विशेषज्ञता ही नहीं, बल्कि उन्नत आईसीयू सुविधा, अनुभवी एनेस्थीसिया टीम, ब्लड बैंक की तत्परता और मल्टीडिसिप्लिनरी समन्वय की भी आवश्यकता होती है।
वहीं फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि प्लेसेंटा परक्रेटा जैसे हाई-रिस्क मामलों का सफल इलाज यह साबित करता है कि अब झारखंड के मरीजों को गंभीर और उन्नत इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि अस्पताल भविष्य में भी मरीजों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत रहेगा।
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