News Saga Desk
नई दिल्ली। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से कर्ज लेने वाले ग्राहकों को राहत देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने लोन रिकवरी एजेंटों के लिए सख्त नियमों का मसौदा जारी किया है। हाल के दिनों में लोन वसूली के नाम पर ग्राहकों के साथ गाली-गलौज, धमकी, मानसिक प्रताड़ना और मारपीट जैसी घटनाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि अब रिकवरी एजेंट ग्राहकों, उनके गारंटर, रिश्तेदारों या दोस्तों को शारीरिक या मानसिक रूप से परेशान नहीं कर सकेंगे। गुमनाम नंबरों से धमकी भरे फोन करना, सार्वजनिक रूप से अपमानित करना या सोशल मीडिया पर वीडियो और रिकॉर्डिंग साझा करना जबरन और अमानवीय तरीका माना जाएगा, जिसे गैरकानूनी श्रेणी में रखा गया है।
नए मसौदे के अनुसार सभी रिकवरी एजेंटों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को एजेंट के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा। साथ ही हर एजेंट के पास इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस का मान्य प्रमाणपत्र होना जरूरी होगा।
आरबीआई ने यह भी कहा है कि जब कोई एजेंट ग्राहक के घर जाएगा, तो उसे अपनी एजेंसी का पहचान पत्र, बैंक का अधिकृत पत्र और नोटिस की प्रति साथ रखना अनिवार्य होगा। इसके अलावा ग्राहक को कम से कम एक दिन पहले सूचना देना भी जरूरी होगा।
नियमों के तहत अब रिकवरी एजेंट शादी-विवाह, शोक या किसी पारिवारिक समारोह के दौरान ग्राहकों से वसूली के लिए संपर्क नहीं कर सकेंगे। फोन कॉल करने का समय भी तय किया गया है। एजेंट अब केवल सुबह आठ बजे से शाम सात बजे के बीच ही ग्राहकों को कॉल कर सकेंगे।
आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि रिकवरी एजेंटों की किसी भी बदसलूकी के लिए संबंधित बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। बैंक यह कहकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकेंगे कि गलती किसी तीसरी एजेंसी की थी। साथ ही बैंकों को अपनी वेबसाइट और मोबाइल अनुप्रयोग पर सभी पंजीकृत रिकवरी एजेंसियों की सूची सार्वजनिक करनी होगी।
प्रस्तावित नियमों को एक अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की संभावना है। इन नियमों के लागू होने के बाद ग्राहकों को लोन वसूली के दौरान होने वाली धमकी और मानसिक प्रताड़ना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
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