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काठमांडू :– नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के उस विवादित बयान को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है। इस बयान के बाद सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। पार्टी के एक वर्ग ने प्रधानमंत्री से बयान वापस लेने और संसद के माध्यम से राष्ट्र से माफी मांगने की मांग की है।
पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री को अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए उसे वापस लेना चाहिए। हालांकि प्रधानमंत्री के करीबी माने जाने वाले कुछ नेता इस कदम के पक्ष में नहीं हैं और उनका कहना है कि बयान को उसके व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
संसद में बयान के बाद बढ़ा विवाद
रविवार को प्रतिनिधि सभा में दिए गए प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। इसके साथ ही भारत-नेपाल सीमा विवाद का मुद्दा फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया। इसी घटनाक्रम के बाद आरएसपी के भीतर भी इस विषय पर मतभेद उभरने लगे।
सूत्रों के अनुसार, आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि जब तक पार्टी की आधिकारिक राय तय नहीं हो जाती, तब तक कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर टिप्पणी न करे।
नेताओं ने सोशल मीडिया पर जताई असहमति
पार्टी नेतृत्व के निर्देश के बावजूद सांसद रञ्जु दर्शना और सांसद आशिका तामाङ सहित कुछ नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री के बयान पर असहमति व्यक्त की है। इससे पार्टी के भीतर मौजूद मतभेद और अधिक स्पष्ट हो गए हैं।
आरएसपी सांसद एवं अधिवक्ता यज्ञमणि न्यौपाने ने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी संभवतः पर्याप्त तैयारी के बिना की गई थी और उनके पूरे वक्तव्य को संदर्भ सहित समझना आवश्यक है।
विपक्ष ने मांगी माफी और रिकॉर्ड से बयान हटाने की मांग
विपक्षी दलों, जिनमें नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी शामिल हैं, ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री से सार्वजनिक माफी मांगने और उनके बयान को संसदीय अभिलेख से हटाने की मांग की है।
पार्टी के कई सांसद निजी तौर पर यह मानते हैं कि बयान में सुधार या स्पष्टीकरण की आवश्यकता है, लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई की आशंका के कारण वे सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखने से बच रहे हैं।
पार्टी सचिवालय में भी हुई चर्चा
सोमवार सुबह रवि लामिछाने के भारत रवाना होने से पहले पार्टी सचिवालय की वर्चुअल बैठक में भी इस विवाद पर चर्चा हुई। बैठक में कई सदस्यों ने कहा कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी अब राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुकी है और इस पर स्पष्ट रुख अपनाना आवश्यक है।
बैठक में यह भी राय सामने आई कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान कूटनीतिक संवाद और आधिकारिक तंत्र के माध्यम से किया जाना चाहिए। कई सदस्यों ने कहा कि नदी के बहाव में बदलाव या तकनीकी सीमा संबंधी मामलों को सीधे “क्षेत्रीय अतिक्रमण” के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
विदेश मंत्रालय की नीति के अनुरूप रुख अपनाने की सलाह
बैठक के दौरान रवि लामिछाने ने कहा कि सीमा संबंधी मुद्दे राजनीतिक दलों की प्रतिस्पर्धा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़े मामले हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पार्टी को व्यक्तिगत व्याख्याओं से बचते हुए नेपाल के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक नीति के अनुरूप अपनी स्थिति रखनी चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, संसदीय विवाद के बाद रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बीच टेलीफोन पर भी बातचीत हुई। इस दौरान लामिछाने ने कथित रूप से प्रधानमंत्री को बताया कि उनके बयान से राजनीतिक और कूटनीतिक जटिलताएं पैदा हुई हैं तथा इस मुद्दे को गंभीरता से संबोधित करने की आवश्यकता है।
विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बढ़ते दबाव के बीच यह विवाद नेपाल की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की निगाहें संसद की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां प्रधानमंत्री इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हैं या कोई नया रुख अपनाते हैं।
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